धर्म

एक घर में सास और बहू दोनों रखें वरलक्ष्मी व्रत तो कलश एक होगा या अलग? जानें पूजा का नियम


Varalakshami Vrat 2026: वरलक्ष्मी व्रत को सुहाग, परिवार की सुख-समृद्धि और देवी लक्ष्मी की कृपा के लिए महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है. दक्षिण भारत इस व्रत का खास महत्तव है. वरलक्ष्मी की पूजा में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है और कलश को देवी के स्वरूप के रूप में स्थापित करके विधि-विधान से पूजा की जाती है, कलश स्थापना से जुड़ी कुछ खास बातें यहां जान लें. 

सास-बहू दोनों व्रत रखें तो कलश एक या दो?

अगर एक ही घर में सास और बहू दोनों वरलक्ष्मी व्रत रख रही हैं, तो दो अलग कलश रखने की शास्त्रीय परंपरा नहीं है, हालांकि परिवारों और पूजा-पद्धतियों में इसके तरीके अलग हो सकते हैं. कलश स्थापना का उद्देश्य देवी वरलक्ष्मी का कलश में आवाहन करना माना जाता है. धार्मिक परंपरा में कलश को शुभता, समृद्धि और देवी-शक्ति का प्रतीक माना गया है.

एक कलश रखें तो पूजा कैसे करें?

  • वरलक्ष्मी कलश की स्थापना करके दोनों सास बहू साथ में संकल्प और पूजा कर सकती हैं. सबसे पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें.
  • रंगोली बनाकर वहां चावल की ढेरी पर कलश स्थापित किया जाता है. कलश में जल, अक्षत, हल्दी आदि रखे जाते हैं और उसके ऊपर आम के पत्ते तथा नारियल रखा जाता है.
  • कई परंपराओं में नारियल पर वरलक्ष्मी का मुख लगाकर उनका शृंगार भी किया जाता है.
  • इसके बाद गणेश पूजा, संकल्प और वरलक्ष्मी देवी का आवाहन किया जाता है.
  • षोडशोपचार पूजा, लक्ष्मी मंत्र, व्रत कथा, नैवेद्य, पूजा के दौरान दोरक (16 गांठ वाले पीला धागा) को देवी लक्ष्मी के चरणों में रखकर अभिमंत्रित करें.
  • पूजन समाप्ति पर महिलाएं इसे अपने दाहिने हाथ पर बांधती हैं.
  •  पूजा के बाद 7, 11 या फिर 21 सुहागिनों को सुहाग की सामग्री भेंट स्‍वरूप दें

वरलक्ष्मी व्रत का महत्व

इस व्रत करने आपके धन-वैभव में वृद्धि के साथ ही आपके पति की आयु भी दोगुनी होती है. नि:संतान लोगों की गोद भर जाती है. इच्छित वर देने वाली मां वरद लक्ष्‍मी दूधिया महासागर से प्रकट हुई थीं. इसलिए मां के इस रूप का रंग भी धवल श्‍वेत माना जाता है. मां का यह रूप भक्‍तों की हर इच्‍छा पूर्ण करता है इस कारण से उन्‍हें वरद लक्ष्‍मी माना गया है.

FAQ
1. क्या वरलक्ष्मी व्रत में दोनों महिलाएं अलग-अलग संकल्प ले सकती हैं?
हां, सास और बहू अपनी-अपनी मनोकामना के लिए अलग संकल्प ले सकती हैं. अगर पूजा एक ही कलश की हो रही है, तब भी दोनों श्रद्धापूर्वक अपना संकल्प लेकर देवी की पूजा कर सकती हैं.

2. वरलक्ष्मी कलश को किस दिशा में स्थापित करना चाहिए?
पूजा की परंपरा में कलश को साफ-सुथरे पूजा स्थान पर स्थापित किया जाता है. दिशा को लेकर अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराएं मिलती हैं, इसलिए परिवार की मान्य पूजा विधि और स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है.

3. क्या वरलक्ष्मी व्रत में केवल सुहागिन महिलाएं ही पूजा कर सकती हैं?
वरलक्ष्मी व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा पति, परिवार और सौभाग्य की कामना से किया जाता है. हालांकि पूजा की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए इसे केवल एक ही नियम तक सीमित करना उचित नहीं है.

4. वरलक्ष्मी व्रत में देवी को क्या भोग लगाएं?
देवी वरलक्ष्मी को परिवार की परंपरा के अनुसार फल, मिठाई, पायसम, पंचामृत और घर में बनाए गए सात्विक पकवानों का भोग लगाया जाता है. दक्षिण भारतीय परिवारों में इस दिन विशेष नैवेद्य तैयार करने की परंपरा भी है.

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