
दतिया में प्रशासनिक स्तर पर हुए एक तबादले को लेकर इन दिनों चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. मामला 17 अगस्त को हुई समय-सीमा (टीएल) बैठक से जुड़ा है. बैठक में दतिया ग्रामीण तहसीलदार अमित दुबे और कलेक्टर के बीच फार्मर आईडी की पेंडेंसी को लेकर तीखी बहस होने की बात सामने आई है. बैठक के अगले ही दिन तहसीलदार का तबादले हो गया. इसके बाद सोशल मीडिया पर तहसीलदार की एक शायराना पोस्ट सामने आई, जिसने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया.
17 अगस्त को हुई टीएल बैठक में जिले के अलग-अलग विभागों के कामकाज की समीक्षा की जा रही थी. इसी दौरान दतिया ग्रामीण क्षेत्र में 500 से ज्यादा किसानों की फार्मर आईडी लंबित मिलने का मामला सामने आया. पेंडेंसी को लेकर कलेक्टर ने तहसीलदार अमित दुबे से जवाब मांगा और जल्द से जल्द लंबित मामलों का निराकरण करने के निर्देश दिए.
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जांच की बात पर बढ़ी नाराजगी
बताया जा रहा है कि तहसीलदार अमित दुबे ने जवाब देते हुए कहा कि हर किसान को व्यक्तिगत रूप से जानना संभव नहीं है. फार्मर आईडी तैयार करने से पहले जरूरी जांच और प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. उनका कहना था कि नियमों के तहत जांच करने में समय लगता है और इसी वजह से कुछ मामले लंबित हैं.
इसी जवाब को लेकर बैठक में माहौल गरम हो गया. चर्चा के दौरान कलेक्टर की नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई. कलेक्टर ने काम में रुचि नहीं लेने वाले अधिकारियों को लेकर कड़ी टिप्पणी की और तहसीलदार को बैठक कक्ष से बाहर जाने के लिए कहा.
माइक बंद किया और बैठक से बाहर निकले
मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब बताया गया कि तहसीलदार अमित दुबे ने अपना माइक बंद किया और बैठक से बाहर चले गए. बैठक में मौजूद अधिकारियों के बीच भी यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया.
टीएल बैठक के अगले दिन अमित दुबे की पदस्थापना में बदलाव कर दिया गया. उन्हें दतिया ग्रामीण तहसीलदार के पद से हटाकर भांडेर में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी दी गई. प्रशासनिक तौर पर इसे पदस्थापना से जुड़ा सामान्य आदेश माना जा रहा है, लेकिन बैठक के ठीक बाद हुए इस बदलाव ने चर्चाओं को जरूर जन्म दे दिया.
सोशल मीडिया पोस्ट ने फिर बढ़ाई चर्चा
तबादले के बाद अमित दुबे की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई. उन्होंने किसी अधिकारी का नाम लिए बिना शायराना अंदाज में लिखा, “मेरी बनती ही नहीं थी सरदार के साथ, इसीलिए फासला बढ़ गया दरबार के साथ.”
इस पोस्ट के सामने आने के बाद इसे टीएल बैठक में हुई बहस और अगले दिन हुए तबादले से जोड़कर देखा जाने लगा. सोशल मीडिया पर भी लोग इस पोस्ट के अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं. हालांकि, पोस्ट में किसी अधिकारी का नाम नहीं लिया गया है और न ही यह साफ तौर पर कहा गया है कि यह शेर तबादले को लेकर ही लिखा गया है.
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पूरे मामले में एक तरफ टीएल बैठक में हुई बहस, उसके अगले दिन पदस्थापना में बदलाव और फिर सामने आई शायराना पोस्ट है. इन तीनों घटनाओं के क्रम ने दतिया के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा जरूर तेज कर दी है.
हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इसे अधिकारियों की पदस्थापना और कामकाज से जुड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है. वहीं, बैठक के घटनाक्रम और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जारी हैं.