खबर

NALSAR दीक्षांत समारोह: CJI सूर्य कांत के चीफ गेस्ट बनने को लेकर छात्र क्यों कर रहे विरोध? | Hyderabad NALSAR Students Demand Rethink On Chief Justice Suryakant Convocation Role



हैदराबाद के नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के दीक्षांत समारोह से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. यूनिवर्सिटी से पासआउट हो रहे छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय प्रशासन से गुहार लगाई है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित करने के फैसले पर एक बार फिर से सोचा जाना चाहिए.

इन छात्रों का कहना है कि जिस मंच से उन्हें संविधान और न्याय की रक्षा की सीख मिली है, वहां ऐसे समय में मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी उनके आदर्शों के खिलाफ नजर आती है. 

यूनिवर्सिटी के कुलपति (VC), रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को भेजे गए एक लिखित पत्र में छात्रों ने साफ कहा है कि दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय का संवैधानिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कसंगत सुनवाई के प्रति प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए.

छात्रों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से हाल ही में प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस बर्बरता के मामले की सुनवाई से इनकार करने का तरीका बेहद निराशाजनक था.

क्या है पूरा मामला?

छात्रों के इस कड़े विरोध की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट की वह टिप्पणी है, जो उसने जंतर-मंतर पर 20 जुलाई 2026 को हुए ‘चलो संसद’ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की जल्द सुनवाई से इनकार करते समय की थी.

छात्रों ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए लिखा कि जब 22 जुलाई को इस मामले को त्वरित सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के सामने रखा गया, तो उन्होंने वकील से कहा, “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए और अपना समय भी बर्बाद मत कीजिए.”

जब याचिकाकर्ता के वकील ने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस की ज्यादतियों और कथित हिंसा के वीडियो सबूत दिखाने की पेशकश की, तो CJI की तरफ से टिप्पणी आई, “हम वीडियो में दिलचस्पी नहीं रखते, हमारे पास देखने का समय नहीं है.” 

इसके अलावा, जब वकील ने विरोध प्रदर्शन के पीछे के कारणों को समझाने की कोशिश की, तो उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि “थैंक यू वेरी मच.”

170 से अधिक लोग हुए थे घायल

छात्रों ने अपने चिट्ठी में यह भी ध्यान दिलाया कि इस घटना को लेकर पहले ही CJI को एक अलग लेटर पिटिशन भेजी जा चुकी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की मांग की गई थी.

इस याचिका में जिक्र किया गया था कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों सहित 170 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए थे. इसके साथ ही, ‘डी.के. बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए दिशानिर्देशों के उल्लंघन का भी हवाला दिया गया था.

‘NALSAR की सीख से मेल नहीं खाता यह रवैया’

ग्रेजुएट हो रहे छात्रों का कहना है,’एक पासआउट बैच के तौर पर ऐसे गणमान्य व्यक्ति से डिग्री लेना, जिनका हालिया सार्वजनिक आचरण नागरिकों पर पुलिस बर्बरता के गंभीर आरोपों के प्रति उपेक्षापूर्ण रहा हो, हमारे लिए सहज नहीं है. यह उन मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ है जो हमें NALSAR में इतने सालों में सिखाए गए हैं.’

छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से पुरजोर अपील की है कि किसी भी औपचारिक निमंत्रण से पहले इस फैसले पर गहराई से विचार किया जाए और स्नातक हो रहे बैच से सलाह ली जाए. इसके साथ ही, छात्रों ने इस विषय पर बातचीत के लिए प्रशासन से समय मांगा है और जल्द से जल्द जवाब देने का अनुरोध किया है.

यह भी पढ़ें: जवाब तो देना होगा… केंद्र पर बरसे राहुल, शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में आंदोलन की तैयारी




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button