धर्म

Sawan 2026: 23 साल बाद सावन में बन रहा ‘सोमवती नागपंचमी’ का महासंयोग! डा. अनीष व्यास से जानें इसका धार्मिक महत्व


Sawan 2026: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. इस वर्ष सावन मास का आरंभ अत्यंत शुभ योगों के साथ हो रहा है. 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से शुरू होकर सावन का महीना 28 अगस्त 2026 तक चलेगा.

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस वर्ष सावन मास का शुभारंभ श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के अत्यंत शुभ संयोग में होगा. इसके अलावा, पहले ही दिन शिववास योग भी बन रहा है, जिसमें भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे. इस योग में पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से सुख-समृद्धि और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है.

सावन 2026, मुख्य तिथियां और सोमवार व्रत सूची

इस साल सावन के महीने में कुल 4 सावन सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे:

गुरु पूर्णिमा: 29 जुलाई 2026 (सावन शुरू होने से एक दिन पूर्व)

सावन मास प्रारंभ: 30 जुलाई 2026 (गुरुवार)

सावन मास समाप्ति & रक्षाबंधन: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)

सावन सोमवार व्रत की तारीखें

सोमवार व्रत दिनांक
पहला सावन सोमवार 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार 17 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार 24 अगस्त 2026

सावन मंगला गौरी व्रत तिथियां:

मंगला गौरी व्रत दिनांक
पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026
दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त 2026
तीसरा मंगला गौरी व्रत 18 अगस्त 2026
चौथा मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त 2026

23 साल बाद ‘सोमवती नागपंचमी’ का दुर्लभ योग

कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस बार सावन की तीसरी सोमवारी (17 अगस्त 2026) को नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा. वर्ष 2003 के बाद पहली बार नागपंचमी सोमवार के दिन पड़ रही है.

भगवान शिव को सोमवार प्रिय है और नाग देवता उनके गले का आभूषण हैं. सोमवार को नागपंचमी पड़ने से इसे सोमवती नागपंचमी कहा जाएगा. इस दिन शिवलिंग पर चंदन, गंगाजल मिश्रित दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है.

गुरु पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक, प्रमुख पर्व और त्योहार

  • गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई 2026): सावन शुरू होने से ठीक एक दिन पहले गुरु पूजन किया जाएगा और नए साधकों के लिए गुरु मंत्र ग्रहण करना बेहद शुभ रहेगा.
  • प्रमुख व्रत: सावन माह में दोनों प्रदोष व्रत, नागपंचमी, हरियाली तीज और कांवड़ यात्रा जैसे प्रमुख आयोजन धूमधाम से मनाए जाएंगे.
  • रक्षाबंधन (28 अगस्त 2026): श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन का पर्व एक ही दिन पड़ने से धार्मिक आयोजनों की विशेष छटा देखने को मिलेगी. इसी दिन सावन मास की पूर्णाहुति होगी.

उत्तर और दक्षिण भारत में सावन की तिथियों का अंतर क्यों?

सावन की शुरुआत को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत में पंचांग की गणना पद्धति के कारण भिन्नता पाई जाती है:

उत्तर भारत (पूर्णिमांत पद्धति): उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से नया महीना शुरू होता है.

दक्षिण व पश्चिम भारत (अमांत पद्धति): महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नया माह शुरू होता है.

इसी कारण उत्तर भारत में सावन मास लगभग 15 दिन पहले शुरू हो जाता है.

सावन में शिव पूजन और मंत्र जप का महत्व

सावन के महीने में भक्त कांवड़ यात्रा निकालकर गंगाजल से भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं तथा मनोकामना पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक कराते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास में ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जप करने से समस्त दुख-दर्द दूर होते हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

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