

नई दिल्ली:
संजय दत्त की लाइफ में 1993 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में गिरफ्तारी के बाद एक बड़ा मोड़ आया. उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत गैर-कानूनी तरीके से हथियार रखने का दोषी ठहराया गया था. 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पांच साल की जेल की सजा सुनाई. हालांकि अच्छे व्यवहार के कारण सजा में छूट मिलने के बाद उन्हें फरवरी 2016 में पुणे की यरवदा जेल से रिहा कर दिया गया. सालों बाद संजय दत्त ने जेल में बिताए अपने समय के बारे में खुलकर बात की है. शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर टूनाइट’ पर बात करते हुए, ‘मुन्ना भाई MBBS’ स्टार ने बताया कि कैसे हालात में आए इतने बड़े बदलाव के बावजूद वे विचलित नहीं हुए. उन्होंने दूसरे कैदियों के साथ जेल की कोठरी शेयर करने के बारे में भी बात की. संजय दत्त ने कहा कि एक अमीर और सुविधा संपन्न परिवार में पले-बढ़े होने के बावजूद, उन्हें कभी भी अपने आस-पास के लोगों से खुद को ऊंचा नहीं समझा.
उन्होंने कहा, आप जानते हैं इतने सालों से… मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जिसे अपने स्टारडम का घमंड हो. मुझमें ऐसी कोई बात नहीं है. कई बार हम सेट पर जमीन पर बैठकर खाना खाते थे. मैंने कई बार सेट पर काम करने वालों के साथ बैठकर खाना खाया है. मुझे इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता. संजय दत्त ने बताया कि अधिकारियों को लगा था कि एक सेलिब्रिटी के तौर पर जिन सुख-सुविधाओं के वे आदी थे, उन्हें छीन लेने से उनका हौसला टूट जाएगा, लेकिन मुझ पर कोई असर नहीं हुआ. क्योंकि मैं टूटा नहीं. वे हैरान रह गए. उनकी तो हवा ही निकल गई. उन्होंने मेरा मजाक उड़ाया. उनमें से एक मेरे पास आया और बोला, ‘तुम्हें यहां कोई सिगरेट नहीं मिलेगी. अब क्या करोगे?’ तो मेरा जवाब था, ‘सर, यहां बीड़ी तो मिलेगी ही.” उन्होंने आगे कहा, “इन बदलावों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा, इसलिए वे परेशान हो गए कि वह इतना जमीन से जुड़ा और बेअसर कैसे है.”
काम की बात करें तो, संजय दत्त को आखिरी बार अक्षय कुमार, अरशद वारसी, सुनील शेट्टी, जैकलीन फर्नांडीस, रवीना टंडन और दिशा पाटनी के साथ ‘वेलकम टू द जंगल’ में देखा गया था. फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर मिली जुली सफलता मिली थी.





