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3 साल तक सिनेमाघरों में चली 57 साल पुरानी फिल्म, रोमांटिक गाने में शर्मिला टैगोर और राजेश खन्ना अलग की थी शूटिंग, आज तक नहीं दिखा फैंस को फर्क | 57 year old film ran in cinemas for three years Sharmila Tagore and Rajesh Khanna shot romantic song separately yet fans never noticed difference



नई दिल्ली:

राजेश खन्ना बॉलीवुड के वो सुपरस्टार हैं, जिन्होंने लगातार कई हिट फिल्में देकर 70 के दशक में अपना सिक्का हिंदी सिनेमा में जमाया. वहीं उनके इस ब्लॉकबस्टर करियर की शुरूआत 1969 में आई उस फिल्म से हुई, जिसमें वह शर्मिला टैगोर के साथ नजर आए. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड बनाए. वहीं यह वो फिल्म थी, जो 3 साल तक सिनेमाघरों में चली. लेकिन बात करें इस फिल्म के गाने की तो दर्शकों को आज तक एक बात नहीं पता होगी कि 57 साल पुराने गाने में एक रोमांटिक गाने की शूटिंग एक शहर में नहीं हुई थी. हालांकि 57 साल बाद भी राजेश खन्ना का किशोर कुमार की आवाज में यह गाना खूब पॉपुलर है. 

राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर का रोमांटिक गाना

यह गाना और कोई नहीं बल्कि 1969 में आई फिल्म आराधना का है, जिसमें मेरे सपनों की रानी खूब पॉपुलर हुआ. 5 मिनट के गाने को किशोर कुमार ने अपनी आवाज से सदाबहार बनाया. इस गाने के गई वर्जन बने, जो हिट साबित हुए. 

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गाने के बोल 

मेरे सपनों की रानी कब आयेगी तू
आई रुत मस्तानी कब आयेगी तू
बीती जाये जिंदगानी कब आयेगी तू
चली आ तू चली आ
मेरे सपनों की रानी कब आयेगी तू
आई रुत मस्तानी कब आयेगी तू
बीती जाये जिंदगानी कब आयेगी तू
चली आ आ तू चली आ…

राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर ने अलग अलग की शूटिंग

IMdb के अनुसार, ‘मेरे सपनों की रानी’ के लिए शर्मिला टैगोर की तारीखें उनकी बंगाली फिल्म ‘अरण्येर दिन रात्रि’ (1970) से टकरा रही थीं, जिसके चलते इस गाने को दार्जिलिंग में राजेश खन्ना और सुजीत कुमार के साथ शूट किया गया. जबकि शर्मिला टैगोर के हिस्से को मुंबई के स्टूडियो में फिल्माया गया. हालांकि गाने में इसका पता नहीं चलता. 

3 साल तक चलने वाली फिल्म है आराधना

आराधना 1969 में रिलीज हुई थी, जिसमें राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी हिट हुई थी. वहीं कहा जाता है कि ‘आराधना’ पहली ऐसी हिंदी फिल्म थी, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (जहां हिंदी नहीं बोली जाती) और दक्षिण भारत के चार राज्यों में 100 दिनों से ज्यादा समय तक हर दिन चार शो के साथ सफलतापूर्वक चली. ‘आराधना’ दक्षिण भारत के सिनेमाघरों में भी 3 साल तक चली और पूरे भारत में प्लैटिनम जुबली हिट रही थी. 

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