
Chandra Grahan 2026: श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. भारत में दृश्यता, सूतक काल और पर्व के शुभ मुहूर्त को लेकर ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा ने सभी जरूरी जानकारियां साझा की हैं.
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को श्रावणी पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के पावन पर्व पर साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. इस खगोलीय घटना के साथ ही सावन माह का समापन भी होगा. ग्रहण के समय चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण करेगा. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह एक गहरा आंशिक (खंडग्रास) चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगी, जिससे चांद लाल-नारंगी आभा के साथ नजर आएगा.
- तारीख व दिन: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार
- समय अवधि: सुबह 08:04 बजे से सुबह 11:22 बजे तक
- भारत में दृश्यता: अदृश्य (नहीं दिखाई देगा)
- सूतक काल: भारत में मान्य नहीं
- धार्मिक प्रभाव: रक्षाबंधन व पूजा-पाठ के सभी कार्य बिना रुकावट होंगे
भारत में क्यों मान्य नहीं होगा सूतक काल?
श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका एवं ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, ग्रहण के समय भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा. प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न देने के कारण देश में इसका सूतक काल लागू नहीं होगा.
शास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि ग्रहण का सूतक और धार्मिक निषेध केवल उन्हीं क्षेत्रों में मान्य होते हैं जहां ग्रहण दृश्यमान हो. चूंकि यह ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा, इसलिए:
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मंदिरों के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे.
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पूजा-अर्चना और दैनिक धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से चलेंगे.
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रक्षाबंधन पर राखी बांधने, श्रावणी उपाकर्म, यज्ञोपवीत संस्कार और पूर्णिमा पूजन पूरे दिन शुभता के साथ किए जा सकेंगे.
किन देशों में देखा जा सकेगा यह ग्रहण?
यह खंडग्रास चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, पश्चिमी एशिया, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर और अंटार्कटिका के क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा.
देश-दुनिया पर पड़ने वाले शुभ-अशुभ प्रभाव
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, इस ग्रहण के प्रभाव से वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर मिले-जुले परिणाम देखने को मिलेंगे:
प्राकृतिक हलचल: भूकंप, अत्यधिक वर्षा, बाढ़, भूस्खलन और समुद्री तूफानों की आशंका बढ़ सकती है.
अर्थव्यवस्था व व्यापार: व्यापार में तेजी आएगी, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और आय में बढ़ोतरी होगी. होटल व रेस्टोरेंट कारोबार के लिए समय अनुकूल रहेगा, जबकि कृषि क्षेत्र में कुछ नुकसान संभव है.
राजनीतिक व सामाजिक माहौल: राजनीति और शासन-प्रशासन में बड़े बदलाव व खींचतान देखने को मिल सकती है. संक्रमण व मौसमी बीमारियों का प्रभाव भी बढ़ सकता है.
अशुभ प्रभावों से बचाव के अचूक उपाय
ग्रहण के प्रतिकूल प्रभावों को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए धार्मिक उपाय करने की सलाह दी जाती है:
- संकटमोचन हनुमान जी की पूजा करें और नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करें.
- भगवान शिव और मां दुर्गा की आराधना करें.
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदायी रहेगा.
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें.
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