मध्य प्रदेश

हिमाचल: धर्मशाला BJP विधायक पर FIR, आय से अधिक संपत्ति के आरोप


धर्मशाला से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के खिलाफ हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV एंड ACB)ने मामला दर्ज किया है. सुधीर शर्मा पर  आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप हैं.

यह कार्रवाई सोर्स इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट के आधार पर की गई प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संबंधित धाराओं के तहत की गई है.

सुधीर शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज

विजिलेंस ने सुधीर शर्मा के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 13(D) और 13(2) के साथ-साथ (2018 संशोधन अधिनियम) की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है. मामले की आधिकारिक जांच का जिम्मा इंस्पेक्टर नरेश कुमार को सौंपा गया है.

विजिलेंस के मुताबिक शिकायत और शुरुआती जांच में पर्याप्त तथ्य मिलने के बाद ही यह मामला दर्ज किया गया है. 2013 से 2023 तक की अवधि के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के आरोपों की गहनता से जांच की जा रही है. जांच अधिकारी को निष्पक्षता और तेजी से मामले के सभी पहलुओं को खंगालने के निर्देश दिए गए हैं. कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

जांच में आय से अधिक संपत्ति और खर्च

प्रारंभिक जांच के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों और वैधानिक संस्थाओं से प्राप्त वित्तीय एवं संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड की जांच की गई है, जिनमें आयकर रिटर्न, चुनावी हलफनामे, संपत्ति रिकॉर्ड, हाउस बिल्डिंग एडवांस से जुड़े दस्तावेज तथा सक्षम अधिकारियों द्वारा किए गए संपत्ति मूल्यांकन शामिल हैं.

जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि संबंधित लोक सेवक की संपत्ति और खर्च उसकी ज्ञात वैध आय के स्रोतों की तुलना में अधिक हैं. उपलब्ध रिकॉर्ड के मिलान के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार होने की बात कही है.

प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों का भी पता चला है, जिनके सत्यापन और गहन परीक्षण की आवश्यकता है. इनमें घोषित आय के स्रोत, भूमि बिक्री से जुड़े लेन-देन, निवेश, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, वाहनों की खरीद तथा आवासीय संपत्ति के निर्माण पर हुए खर्च शामिल हैं.

अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी होगी जांच

विजिलेंस के अनुसार, निर्माण कार्य से जुड़े कुछ रिकॉर्ड अभी उपलब्ध नहीं हो सके हैं. इसके साथ ही आवासीय संपत्ति के मूल्यांकन, इंटीरियर कार्य, फिक्स्चर और फर्निशिंग पर हुए खर्च का तकनीकी आकलन भी किया जाना शेष है.

ब्यूरो ने कहा है कि जांच के दायरे में वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन, चल एवं अचल संपत्तियां, निवेश, डिजिटल साक्ष्य और आवासीय संपत्ति का तकनीकी मूल्यांकन शामिल रहेगा. जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके संबंध में भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

 



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