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सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद आर्ट ऑफ लिविंग का बड़ा कदम, झूठे आरोप लगाने वालों पर मानहानि केस की तैयारी | Art of Living Considers Defamation Action Over Allegations in Yamuna World Culture Festival Row



यमुना के बाढ़ क्षेत्र में आयोजित वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल को लेकर लगभग एक दशक तक चले विवाद के बाद अब आर्ट ऑफ लिविंग कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है. संगठन का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट में हुई लंबी प्रक्रिया और जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि कार्यक्रम से यमुना के फ्लडप्लेन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था. इसके बाद संगठन उन लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने पर विचार कर रहा है जिन्होंने पर्यावरणीय नुकसान के आरोप लगाए थे.

‘झूठे आरोप लगाने वालों को जवाब देना होगा’

आर्ट ऑफ लिविंग के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन के खिलाफ कुछ लोगों ने बिना आधार के आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा, ‘पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करने वाले संगठन पर झूठे आरोप लगाने वाले कुछ स्वार्थी लोगों का रवैया अब सबके सामने आ गया है.’

क्या था विवाद?

विवाद 2016 में यमुना के फ्लडप्लेन पर आयोजित वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल को लेकर शुरू हुआ था. कार्यक्रम के बाद कुछ पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संगठनों ने आरोप लगाया था कि आयोजन से यमुना की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा है.

आर्ट ऑफ लिविंग लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा और दावा करता रहा कि कार्यक्रम पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए आयोजित किया गया था.

दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल था फेस्टिवल

आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार, तीन दिवसीय इस आयोजन में  155 देशों से 35 लाख से ज्यादा लोग, 37000 से ज्यादा कलाकार, 2500 आध्यात्मिक और धार्मिक नेता, 20000 अंतरराष्ट्रीय मेहमान और 5000 बिजनेस लीडर शामिल हुए. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. संगठन का कहना है कि इस आयोजन में भारत की 30 से अधिक सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित किया गया. इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन क्षेत्र के लिए अनुमानित 42 मिलियन डॉलर की कमाई हुई.

आर्ट ऑफ लिविंग के मुताबिक, इतने बड़े स्तर का आयोजन होने के बावजूद कार्यक्रम के दौरान कोई बड़ी कानून-व्यवस्था की समस्या या हिंसक घटना सामने नहीं आई. फिर भी गर्व के साथ मनाए जाने के बजाय, इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को मजाक, विवाद और झूठे आरोपों के आधार पर एक दशक तक चले मीडिया ट्रायल का सामना करना पड़ा, जो अब न्यायिक जांच में गलत साबित हुए हैं.





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