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सिर्फ 60 साल में बंजर पहाड़ को बना दिया जंगल, जानिए कैसे साउथ कोरिया ने लगाए 12 अरब पेड़ | How South Korea Planted 12 Billion Trees and Turned Its Barren Mountains Green in Just Six Decades



दुनियाभर में जहां पर्यावरण संरक्षण और पेड़-पौधे लगाने की चर्चा होती है, वहीं साउथ कोरिया ने इस मामले में अपनी अलग पहचान बनाई है. आज साउथ कोरिया दुनिया को सबसे सफल वनीकरण अभियानों के लिए जाना जाता है. लेकिन लेकिन यह सफलता रातों-रात नहीं मिली. कोरियाई युद्ध, अत्यधिक कटाई और ईंधन के लिए लकड़ी पर निर्भरता ने देश के जंगलों को लगभग बर्बाद कर दिया था.  लेकिन कोरिया ने पिछले करीब 6 दशकों में अपने देश को हरा-भरा करके दिखाया.

1960 तक बर्बाद हो चुके थे जंगल

दशकों तक हुए दोहन और युद्ध की तबाही के कारण दक्षिण कोरिया के जंगल तेजी से खत्म हो गए थे. 1960 तक देश का औसत ‘ग्रोइंग स्टॉक’ यानी पेड़ों की कुल मात्रा घटकर केवल 10.6 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर रह गया था, जबकि 1900 के शुरुआती वर्षों में यह करीब 100 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर था. बड़े पैमाने पर पेड़ कट चुके थे, पहाड़ों पर मिट्टी का कटाव बढ़ रहा था और ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन के लिए लकड़ी की कमी होने लगी थी. इससे पर्यावरण पर संकट पैदा हो गया.

जब कोरिया ने शुरू किया 12 अरब पेड़ लगाने का अभियान

इस स्थिति को बदलने के लिए साउथ कोरिया की सरकार ने 1959 से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान शुरू किया. 1962 से 1992 के बीच 45 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में दोबारा जंगल विकसित किए गए. करीब 12 अरब पेड़ लगाए गए. इस अभियान के तहत जापानी लार्च, पिच पाइन, पॉपलर, ब्लैक लोकस्ट और एल्डर जैसी प्रजातियां लगाई गईं, जो खराब जमीन पर भी तेजी से बढ़ सकती थीं. 

जंगल की सुरक्षा पर किया फोकस

साउथ कोरिया की सफलता की सबसे बड़ी वजह यह थी कि उसने सिर्फ पेड़ लगाने पर नहीं, बल्कि जंगलों की सुरक्षा पर भी बराबर ध्यान दिया. सरकार ने राष्ट्रीय वनीकरण योजनाएं लागू कीं, जंगलों की निगरानी बढ़ाई और अवैध कटाई पर रोक लगाई. इसके अलावा कोरिया ने ग्रामीण इलाकों में जलाऊ लकड़ी पर निर्भरता कम की. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर नए लगाए गए जंगलों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती, तो यह अभियान सफल नहीं हो पाता.

समय के साथ जंगल खुद बदलने लगे

दिलचस्प बात यह है कि लगाए गए पेड़ हमेशा स्थायी नहीं रहे. 2004 में छपी एक स्टडी के अनुसार, कई इलाकों में शुरुआती दौर में लगाए गए पेड़ों की जगह धीरे-धीरे स्थानीय प्रजातियों ने लेना शुरू कर दिया. उदाहरण के लिए पिच पाइन और ब्लैक लोकस्ट वाले क्षेत्रों में ओक के पेड़ उगने लगे. कुछ जगहों पर जापानी लार्च की जगह स्थानीय कोरियन रेड पाइन विकसित हुआ. यानी जंगल केवल लगाए नहीं गए, बल्कि समय के साथ प्राकृतिक रूप से विकसित भी हुए.

क्या कहते हैं आंकड़े?

साउथ कोरिया के जंगलों के आंकड़े पूरी कहानी बयां करते हैं.  1960 में साउथ कोरिया में जहां केवल 10.6 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर जंगल बचे थे. वहीं 1999 में यह आंकड़ा करीब 6 गुना बढ़कर 60.3 क्यूबिक मीटर प्रति हेक्टेयर हो गया. 2020 में पेड़ों का कुल भंडार 1953 के स्तर से करीब 29 गुना ज्यादा तक हो गया.

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