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सिंगापुर में लाखों की सैलरी छोड़ हिमालय के गांव में शिफ्ट हुआ कपल, बोला- मां ने सोच बदल दी | Singapore Couple Shifts Himalayas Village Uttarakhand After Left Corporate Job Viral Video



Viral Video: लोग दिन रात पढ़ते हैं कि उन्हें अच्छी सी नौकरी मिल जाए. नौकरी में अच्छी सैलरी मिले, ताकि वह लक्जरी लाइफ जी सकें. अच्छे शहर में रह सकें और अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में भेज सकें. पर एक भारतीय कपल ने सिंगापुर (Singapore) जैसे देश में लाखों रुपये की नौकरी छोड़ दी और वहां से आकर भारत में हिमालय के गांव में बस गया. और तो और सिंगापुर से हिमालय के गांव में बसने वाले कपल का एक 4 साल का बच्चा भी है, जो साथ में रहता है. वह सिंगापुर की ऐशो-आराम जिंदगी से एकदम उलट गांव में अब अपने मम्मी-पापा को माई और बापू कहता है. 

दिल्ली में मिले थे गरिमा-आदित्य

कपल का नाम है गरिमा और आदित्य. उनका इंस्टाग्राम पर LifeofMaai नाम से अकाउंट है, जिस पर वे अपने डेली रूटीन व अन्य चीजें शेयर करते रहते हैं. आदित्य मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के शिमला के रहने वाले हैं और पत्नी गरिमा से उनकी पहली मुलाकात दिल्ली के एक कॉलेज में हुई थी. फिर दोनों में प्यार हो गया. इसके बाद 2015 में गरिमा से शादी करके आदित्य सिंगापुर चले गए. 

आदित्य ने एक वीडियो में बताया कि मैंने अपनी पत्नी से करीब 15 साल पहले पहले कहा था, अगर इतने करोड़ जमा हो गए तो सब कुछ छोड़कर पहाड़ पर चला जाऊंगा. करोड़ों का पता नहीं, लेकिन मैं सच में पहाड़ों के एक गांव में आराम की जिंदगी जी रहा हूं.

उत्तराखंड के पहाड़ों पर बसे एक गांव में रहता कपल

आदित्य अपनी पत्नी गरिमा और अपने बेटे वेदस के साथ उत्तराखंड में हिमालय के पहाड़ों में बसे एक गांव में रहते हैं. सिंगापुर से हिमालय के गांव में बसने के अपने फैसले की कहानी के बारे में आदित्य कहते हैं, मैं एक मीटिंग में था. उस समय मेरा फोन बजा और मेरी मां ने बर्फबारी के कुछ वीडियो भेजे थे. मैंने चुपके से टेबल के नीचे से वे वीडियो देख लिए. मीटिंग खत्म हुई तो मैं अपनी डेस्क पर वापस आया और गूगल अर्थ पर पहाड़ों को देखने लगा. मैं चुपके से कहीं न कहीं उस गांव, पहाड़ के उस कोने को ढूंढ रहा था, जहां मैं एक दिन रिटायर होकर आराम भरी पहाड़ी ज़िंदगी जी सकूं.

35 साल की उम्र में नौकरी छोड़ आ गए 

आदित्य ने आगे बताया, “उसी दिन कुछ ऐसा हुआ कि मैंने सोच लिया, मैं नौकरी छोड़ दूंगा. कब, कैसे, यह पता नहीं था, लेकिन मुझे यह भी समझ आ गया था कि यह सिलसिला कभी खत्म नहीं होगा. सैलरी का लालच, टाइटल और ओहदों के पीछे भागना चलता ही रहेगा. मैं ऐसे ही बूढ़ा हो जाऊंगा. पर आखिरकार 35 साल की उम्र में अपनी पत्नी और 4 साल के बच्चे के साथ हम सब कुछ छोड़कर चले आए. मैंने सिंगापुर की सैलरी, टाइटल, दशकों से बनाया हुआ करियर सबकुछ छोड़ दिया.

पहला महीना बहुत रोमांचक था- आदित्य

हम ग्रामीण भारत में रहने चले गए और वहीं से हमारी यात्री की शुरुआत हो गई. आदित्य ने वीडियो में कहा कि सच कहूं तो पहला महीना बहुत रोमांचक था. सब कुछ बहुत बढ़िया और मज़ेदार लग रहा था, जैसे हम अपनी मंज़िल पर पहुंच गए हों. लेकिन धीरे-धीरे हालात थोड़े डरावने लगने लगे. 30 साल की सोच और आदतों से जुड़े सारे डर और असुरक्षाएं वापस लौट आईं और हम पर ज़ोरदार असर डाला. 

उस समय हार मानने के बजाय हमने बस इस प्रक्रिया को अपना लिया. आखिरकार हमें एहसास हुआ कि रोज़ की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से हटकर भी एक रास्ता मुमकिन है. तो आज यहां बैठकर बात करते हुए मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि हमें वह रास्ता मिल गया है. अब हमारे पास बहुत सारा समय है. हमारी सुबह अलार्म या तय रूटीन से शुरू नहीं होती. हमारी सुबहें बहुत आराम भरी होती हैं. हमारे बच्चों का बचपन बहुत धीमा है और हम उस बचपन में बहुत मौजूद हैं और यही कारण है कि हमने सब कुछ छोड़ दिया और यही कारण है कि हम यहां हैं.

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