
इंदौर में पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों का आंदोलन सोमवार (20 जुलाई) को उस समय उग्र हो गया, जब भोपाल कूच के लिए निकले किसानों के काफिले को बरलाई क्षेत्र के पास पुलिस ने रोक दिया. किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन देने के लिए भोपाल जाने की तैयारी की थी, लेकिन पुलिस ने आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद किसानों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया.
हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग भी किया. कार्रवाई से नाराज किसान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए.
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करणी सेना के नेतृत्व में करीब 39 गांवों के किसान ट्रैक्टरों और 4 पहिया वाहनों के साथ भोपाल के लिए रवाना हुए थे. किसानों का कहना है कि पश्चिमी रिंग रोड के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से दिया जा रहा मुआवजा मौजूदा बाजार कीमत के मुकाबले काफी कम है. किसानों की मांग है कि उन्हें जमीन के बदले 4 गुना मुआवजा दिया जाए और गाइडलाइन दरों में संशोधन कर उचित भुगतान सुनिश्चित किया जाए.
बरलाई में रोका काफिला, बढ़ा तनाव
सुबह से ही अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में किसान इंदौर पहुंचे. बरलाई के पास पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए किसानों के काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया. काफी देर तक प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत होती रही, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी.
जब किसान आगे बढ़ने पर अड़े रहे तो पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े, फिर वाटर कैनन चलाया. इसके बाद भी प्रदर्शन जारी रहने पर हल्का बल प्रयोग किया गया. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया.
ग्रामीण डीएसपी उमाकांत चौधरी ने बताया कि किसानों ने प्रदर्शन और रैली के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली थी. उनका कहना है कि प्रदर्शनकारी ट्रैक्टरों के साथ जबरन आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे और हाईवे पर चक्काजाम करने की स्थिति बन रही थी.
ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और टियर गैस का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार किसान नेताओं से बातचीत कर रहा है और आपसी सहमति से समाधान निकालने की कोशिश जारी है.
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आंदोलन तेज करने की चेतावनी
पुलिस कार्रवाई के बाद किसानों ने सड़क पर धरना शुरू कर दिया. किसान नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा. किसानों का कहना है कि उचित मुआवजा मिले बिना वे अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि खेती ही उनके परिवारों की आजीविका का सबसे बड़ा सहारा है.