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‘भोला बचपन दुखी जवानी’ 70 साल पुराना गाना, मीना कुमारी-डेजी ईरानी की इमोशनल केमेस्ट्री, हेमंत कुमार और लता मंगेशकर की आवाज में सदाबहार | Bhola Bachpan Dukhi Jawani 70 year old Song Meena Kumari Daisy Irani Emotional Acting Silver Jubilee in cinemas Hemant Kumar Lata Mangeshkar Evergreen Voicea



नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा के पुराने गीतों की दुनिया में कुछ गाने ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही बीते दौर की तस्वीर आंखों के सामने उभर आती है. ऐसा ही एक दिलचस्प गीत है ‘भोला बचपन दुखी जवानी’. यह गीत साल 1956 में रिलीज हुई फिल्म ‘एक ही रास्ता’ का है. 70 साल पुराने इस बॉलीवुड गीत को लता मंगेशकर और हेमंत कुमार ने गाया था जबकि इसका म्यूजिक हेमंत कुमार ने तैयार किया और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी थे. सात दशक बीत जाने के बाद भी इस गाने का सच नहीं बदला है. वैसे भी 1950 का दशक हिंदी सिनेमा के लिए बदलाव का दौर था. सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बन रही थीं और गीत-संगीत में भी नए प्रयोग दिखाई दे रहे थे. ‘भोला बचपन दुखी जवानीॉ’ इसी माहौल का उदाहरण है. 

जिंदगी का आईना है ये गाना

‘एक ही रास्ता’ बी.आर. चोपड़ा के बैनर बी.आर. फिल्म्स की पहली फिल्म भी थी. फिल्म के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर बी.आर. चोपड़ा थे. कहानी, पटकथा और संवाद की जिम्मेदारी मुखराम शर्मा ने संभाली थी. फिल्म 13 अप्रैल 1956 को रिलीज हुई थी. फिल्म की कहानी परिवार, रिश्तों, सामाजिक सोच और इंसानी भावनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म में अशोक कुमार, मीना कुमारी, सुनील दत्त और डेजी ईरानी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए. इनके अलावा जीवन, कुमकुम और यशोधरा भी फिल्म का हिस्सा थे.

‘एक ही रास्ता’ में मीना कुमारी ने मालती का किरदार निभाया, जबकि अशोक कुमार प्रकाश मेहता की भूमिका में थे. सुनील दत्त अमर के रोल में नजर आए. फिल्म में डेजी ईरानी का भी महत्वपूर्ण रोल था. 

हेमंत कुमार और मजरूह की जोड़ी

‘एक ही रास्ता’ का म्यूजिक हेमंत कुमार का था और मजरूह सुल्तानपुरी के बोल थे. दोनों की जोड़ी ने फिल्म के संगीत को अलग-अलग भावनाओं से भर दिया. ‘भोला बचपन दुखी जवानी’ में लता मंगेशकर और हेमंत कुमार की आवाज का दर्द इसे खास बनाता है. फिल्म के दूसरे गीतों में ‘चली गोरी पी से मिलन को चली’, ‘बड़े भैया लाये हैं लन्दन से छोरी’, ‘चमका बन कर अमन का तारा’, ‘कैसी लगी कैसी लगी जाए’ और ‘उड़ले हैं मेरे गम की हंसी’ जैसे गीत शामिल थे. गीत के बोल हैं…

भोला बचपन दुखी जवानी, लंबी सुनी राहों में
निकले दर्द लिए मंज़िल का, दो खामोश निगाहों में
कौन कहे राही को कितनी, दूर कहाँ तक जाना है
जीवन की सुनसान डगर में, कब तक ठोकर खाना है…

‘एक ही रास्ता’ भी अपने समय में सफल फिल्मों में शामिल रही और 25 हफ्ते से अधिक सिनेमाघरों में चलने के कारण इसे जुबली हिट का दर्जा मिला. लेकिन  इसका गाना ‘भोला बचपन दुखी जवानी’ आज भी सुनने पर कमाल का एहसास देता है.




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