

आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और भक्ति के लिए विशेष माना जाता है. इस दिन व्रत रखने के साथ भगवान विष्णु का ध्यान, पूजा और पाठ करने से भक्त को आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है. अगर आपने व्रत नहीं रखा है, तब भी भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु चालीसा का पाठ किया जा सकता है. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, इंदिरा एकादशी के दिन श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की आराधना करना शुभ माना जाता है.
6 अक्टूबर को रखा जाएगा इंदिरा एकादशी व्रत
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, हिंदू पंचांग में आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर 2026 को रात 2:07 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर की रात 12:34 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर को रखा जाएगा.
भगवान विष्णु की पूजा के साथ करें विष्णु चालीसा का पाठ
आचार्य ने इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद श्री विष्णु चालीसा का पाठ करने की सलाह दी है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और भक्त का ध्यान सकारात्मकता की ओर जााता है. व्रत न रखने वाले लोग भी श्रद्धा के साथ विष्णु चालीसा का पाठ कर सकते हैं.
इंदिरा एकादशी को करें ये उपाय
दोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥
विष्णु चालीसा
नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥
शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
संत भक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥
आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फंद छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥
असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥
तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥
हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारी ॥
चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥
शीलदया संतोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥
करहुं प्रणाम कौन विधि सुमिरन, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥
सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥
॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥
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मनोकामना के लिए श्रद्धा से करें भगवान विष्णु का स्मरण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का दिन भगवान विष्णु की भक्ति के लिए विशेष होता है. इस दिन पूजाा के दौरान अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखकर सच्चे मन से प्रार्थना की जाती है. आचार्य के मुताबिक पूजा में दिखावे से ज्याादा श्रद्धा और भक्ति का महत्व माना गया है.
पूजा के दौरान रखें इस बात का ध्यान
भगवान विष्णु की पूजा करते समय मन को शांत रखें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा-पाठ करें. विष्णु चालीसा का पाठ पूरा करने के बाद भगवान से सुख-शांति और परिवार के कल्याण की प्रार्थनाा करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भक्ति और सेवा की भावना से किया गया स्मरण विशेष फलदायी मााना जाता है.
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