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बंटवारे में लुटा-पिटा आया भारत, पाकिस्तानी दोस्त से लिया ‘HERO’ नाम, बना दी दुनिया की सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी | Success Story of Hero Cycle and Motocorp Founder Brijmohan Lall Munjal | The Hero MotoCorp Story


जब मैं छोटा बच्चा था तो पापा ने साइकिल दिलाई थी. उस साइकिल को सीखने के दौरान मैंने कई बार घुटने और हाथ छिलवाए. कई बार चोट लगी. लेकिन जब साइकिल सीखा तो बाजार में ऐसे इतरा कर निकलता था जैसे कोई राजा साब की सवारी जा रही हो. मेरे पास हीरो साइकिल थी. आज सड़क पर दौड़ती हर दूसरी टू-व्हीलर पर आपको एक नाम जरूर दिखेगा – ‘हीरो’ (Hero). लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैसे एक गरीब किसान के बेटे ने साइकिल के पुर्जे बेचने से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी बाइक कंपनी तक का सफर तय किया? यह कहानी है उस ब्रांड की, जिसका साथ कभी होंडा ने छोड़ दिया था. और मार्केट का कहना था कि अब हीरो कंपनी खत्म. तो उस मुस्लिम शख्स की कहानी, जिसने पाकिस्तान जाते वक्त अपना ब्रांड नाम मुंजाल बंधुओं को दे दिया था. 

brijmohan lall munjal old photo

बृजमोहन लाल मुंजाल

बंटवारे का दर्द और एक नई शुरुआत

इसकी शुरुआत होती है 1 जुलाई 1923 को, पाकिस्तान के एक छोटे से शहर कमालिया में. एक गरीब किसान के घर जन्म हुआ बृजमोहन लाल मुंजाल का. घर में पैसों की तंगी थी, इसलिए बृजमोहन का पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगा. उनका दिमाग तो बस एक ही दिशा में दौड़ता था – बिजनेस. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. 1947 का साल था. देश को आजादी तो मिली, लेकिन बंटवारे का ऐसा गहरा जख्म दे गई, जिसने मुंजाल परिवार से उनका सब कुछ छीन लिया. अपनी जान बचाकर यह परिवार पंजाब के लुधियाना आ बसा.  

The Hero MotoCorp Story munjal Brother

Photo Credit: मुंंजाल बंधु

लुधियाना में न छत थी, न पैसा और न ही कोई काम. लेकिन बृजमोहन उस मिट्टी के नहीं बने थे जो आसानी से टूट जाएं. उन्होंने एक छोटी सी दुकान खोली और साइकिल के पार्ट्स बेचने लगे. उस दौर में साइकिल के पार्ट्स विदेशों से आते थे और पूरा कंट्रोल ब्रिटिश एजेंसियों के हाथ में था. मुंजाल को यह गुलामी खटक रही थी. एक बार उनके भाई ओम प्रकाश डनलप कंपनी गए, तो मैनेजर ने उन्हें दो दिन तक दरवाजे पर इंतजार करवाया. यह वो चिंगारी थी जिसने बृजमोहन के भीतर आग लगा दी. उन्हें समझ आ गया कि ‘पराए भरोसे कभी अपनी इमारत नहीं खड़ी होती’. उन्होंने तय किया कि अब वे खुद साइकिल के पार्ट्स बनाएंगे.

पाकिस्तान गया शख्स, भारत को दे गया ‘हीरो’

हीरो ब्रांड से जुड़ा एक किस्सा बेहद मशहूर है. हुआ यूं कि जब अमृतसर से मुंजाल भाई अपना सामान बांधकर लुधियाना जाने की प्लानिंग कर रहे थे. तो उसी वक्त एक मुस्लिम शख्स करीम दीन पाकिस्तान जा रहे थे. करीम दीन का साइकिल सैडल्स बनाने का धंधा था और वह ‘हीरो’ ब्रांड नेम से अपना बिजनेस करते थे. पाकिस्तान जाते वक्त करीम दीन ने अपने दोस्त ओम प्रकाश मुंजाल से आखिरी मुलाकात की. ओम प्रकाश ने करीम से उसका ब्रैंड नेम हीरो इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी तो उन्होंने हामी भर दी. यही वो हीरो ब्रांड है जो आगे चलकर पूरी दुनिया में छाने वाला था. 

हीरो का उदय

यह फैसला ‘लोहे के चने चबाने’ जैसा था. ना तकनीक, ना पैसा और ब्रिटिश एजेंसियों का एकाधिकार. लाइसेंस पाने के लिए मुंजाल भाइयों ने दिल्ली के सरकारी दफ्तरों की खाक छानी. उनकी ‘जी-तोड़ मेहनत’ रंग लाई और 1956 में लाइसेंस मिल गया. महज 500 रुपये का लोन लेकर ‘हीरो साइकिल्स’ की नींव रखी गई.

शुरुआती दौर में झटके भी लगे, उनका पहला प्रोडक्ट फेल हो गया. डीलरों ने माल वापस कर दिया, लेकिन मुंजाल भाइयों ने बिना कोई बहाना बनाए पैसे लौटा दिए. ‘जान जाए पर साख न जाए’ – इसी उसूल ने हीरो ब्रांड की इज्जत बचा ली. उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और ऐसा प्रोडक्ट बनाया कि मार्केट में धूम मच गई. सफलता ने ऐसे कदम चूमे कि 1986 में 22 लाख साइकिलें बनाकर उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया.   

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Hero Honda: एक ऐतिहासिक साझेदारी

बृजमोहन मुंजाल की उड़ान अभी बाकी थी. भारत में लोगों को सस्ती और अच्छी माइलेज वाली मोटरसाइकिल चाहिए थी. इसके लिए उन्हें तकनीक की जरूरत थी और तब जापान की ‘Honda’ का साथ मिला. 1984 में जन्म हुआ ‘Hero Honda’ का. दोनों के बीच एक बेजोड़ पार्टनरशिप हुई. हीरो ने दिया हिंदुस्तान के चप्पे-चप्पे में फैला अपना शानदार डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, और होंडा ने दी अपनी दमदार इंजन टेक्नोलॉजी. इस ब्रांड ने दशकों तक भारत की सड़कों पर राज किया.

1985 में इन्होंने ‘CD 100’ लॉन्च की. इस बाइक ने तो बाजार में भूचाल ला दिया. 80 KMPL का माइलेज देकर इसने सबको चौंका दिया. ‘Fill it, Shut it, Forget it’ का नारा हर जुबान पर चढ़ गया और 2001 आते-आते हीरो होंडा दुनिया की नंबर वन टू-व्हीलर कंपनी बन गई.  

hero honda cd 100

कहानी में ट्विस्ट, टूट गया बरसों का साथ

सब कुछ एक शानदार सफर की तरह चल रहा था, लेकिन साल 2000 आते-आते कहानी ने करवट ली. होंडा ने एक ऐसा दांव चला जिसने इस मजबूत रिश्ते में दरार डाल दी. होंडा ने भारत में अपनी एक अलग चाइल्ड कंपनी लॉन्च कर दी, जो सीधे तौर पर हीरो होंडा को ही टक्कर देने लगी. बात सिर्फ यहीं तक नहीं थी. कॉन्ट्रैक्ट की बेड़ियों में जकड़े हीरो के साथ जो हो रहा था, वो किसी भी स्वाभिमानी कंपनी को चुभता.

हीरो अपनी ही बनाई बाइक्स को विदेशों में नहीं बेच सकता था. यानी एक्सपोर्ट पर रोक थी. किसी भी नए रिसर्च (R&D) प्रोजेक्ट के लिए हीरो को होंडा के सामने हाथ फैलाने पड़ते थे और परमिशन लेनी पड़ती थी. ब्रांडिंग और रॉयल्टी के पैसों को लेकर दोनों के बीच लगातार टेंशन बढ़ने लगी थी.

फिर हुआ असली ‘HERO’ का उदय

पानी सिर से ऊपर जा चुका था. धीरे-धीरे हालात इतने खराब हो गए कि साल 2010 में वो हुआ जिसने भारतीय कॉर्पोरेट जगत में भूचाल ला दिया. हीरो और होंडा ने अपनी राहें अलग करने का फैसला कर लिया. यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा डी-मर्जर था. उस वक्त बाजार के कई पंडितों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि “होंडा की तकनीक के बिना हीरो सर्वाइव नहीं कर पाएगा”. लोगों को लगा कि हीरो का खेल अब खत्म हो गया. लेकिन हीरो तो आखिर हीरो था. साल 2011 में एक नए अवतार में शुरुआत हुई- ‘हीरो मोटोकॉर्प’ (Hero MotoCorp) की. और देखते ही देखते इस स्वदेशी कंपनी ने बाजार में अपना ऐसा दबदबा कायम किया कि उन तमाम लोगों को गलत साबित कर दिया जो इसके गिरने का इंतजार कर रहे थे. 

brijmohan lall munjal

2016 में हीरो ने अपनी पहली पूरी तरह स्वदेशी बाइक ‘Splendor iSmart’ लॉन्च की. इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर नहीं देखा. आज के आंकड़े गवाह हैं, 2024 में जहां Honda ने 58 लाख गाड़ियां बेचीं, वहीं हीरो ने 59 लाख गाड़ियां बेचकर अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को धूल चटा दी.





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