
छत्तीसगढ़ के वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों की स्थिति एक बार फिर चर्चा में है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में प्रस्तुत ताजा स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कई सांसदों, विधायकों और पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज 20 से अधिक आपराधिक मामले विभिन्न विशेष और फास्ट-ट्रैक अदालतों में लंबित हैं. इन मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री, वर्तमान विधायक, पूर्व विधायक और पूर्व सांसद शामिल हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी, दंगा, आगजनी, शासकीय कार्य में बाधा और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े प्रकरणों की नियमित सुनवाई जारी है. न्यायालय इन मामलों की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अधिकांश मामलों में आगामी सुनवाई की तिथियां भी निर्धारित की जा चुकी हैं.
हाईकोर्ट में पेश हुई लंबित मामलों की स्थिति
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष पेश स्टेटस रिपोर्ट में जनप्रतिनिधियों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों की अद्यतन जानकारी दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की विभिन्न अदालतों में 20 से अधिक प्रकरण विचाराधीन हैं. इन मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों, फास्ट-ट्रैक अदालतों और अन्य सक्षम न्यायालयों में की जा रही है. न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग भी की जा रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं के मामलों पर नजर
रिपोर्ट के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, विधायक देवेंद्र यादव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव तथा पूर्व सांसद मधुसूदन यादव समेत कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई जारी है. इन मामलों को उनकी प्रकृति और कानूनी जटिलताओं के आधार पर अलग-अलग अदालतों में चलाया जा रहा है.

सीबीआई अदालत में चल रही महत्वपूर्ण सुनवाई
रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कैलाश मुरारका और विजय भाटिया से संबंधित मामले की सुनवाई जारी है. रिपोर्ट के अनुसार इस प्रकरण में आपराधिक षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम से संबंधित आरोपों की न्यायिक समीक्षा की जा रही है. वहीं मामले में आगे की कार्यवाही अदालत के समक्ष लंबित है.
मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाले से जुड़े मामले
पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई ईडी और एसीबी की विशेष अदालतों में चल रही है. इसी प्रकार विधायक देवेंद्र यादव के खिलाफ भी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले अदालतों में विचाराधीन बताए गए हैं. इन मामलों में जांच एजेंसियों और बचाव पक्ष की ओर से कानूनी प्रक्रिया जारी है.

बिलासपुर में अटल श्रीवास्तव के मामले की सुनवाई
बिलासपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और अन्य आरोपियों से जुड़े मामले की सुनवाई चल रही है. रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में 1 जुलाई 2026 को आरोप तय करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है. अदालत आगामी सुनवाई में संबंधित पक्षों की दलीलें सुनेगी.
बलौदाबाजार में भी लंबित हैं कई अहम प्रकरण
बलौदाबाजार की अदालतों में विधायक देवेंद्र यादव और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई जारी है. इन मामलों में दंगा, आगजनी, हत्या के प्रयास और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर आरोप शामिल बताए गए हैं. वहीं पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट से जुड़े मामले भी न्यायिक प्रक्रिया में हैं.
धोखाधड़ी और बलवा के मामलों में भी सुनवाई जारी
जांजगीर-चांपा, कवर्धा और गरियाबंद जिलों की अदालतों में भी कई पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है. इन मामलों में धोखाधड़ी, बलवा, रास्ता रोकने, शासकीय कार्य में बाधा डालने और अन्य आरोपों से संबंधित प्रकरण शामिल हैं. पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी, गोवर्धन मांझी और रोहित साहू सहित कई नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों पर अदालतें सुनवाई कर रही हैं.
पूर्व सांसद मधुसूदन यादव के छह मामलों पर रोक
राजनांदगांव की विशेष अदालत में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव और मोहम्मद खालिद के खिलाफ छह अलग-अलग प्रकरण दर्ज हैं. हालांकि इन मामलों से संबंधित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण फिलहाल हाईकोर्ट ने आगे की सुनवाई पर रोक लगा रखी है. अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा.
फास्ट-ट्रैक कोर्ट में नियमित मॉनिटरिंग
स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों को लंबित रखने के बजाय समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसी उद्देश्य से विशेष और फास्ट-ट्रैक अदालतों में नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है. अधिकांश मामलों में आगामी तारीखें तय हैं और न्यायिक प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है.
जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों पर बनी हुई है न्यायपालिका की नजर
हाईकोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट से स्पष्ट है कि प्रदेश के कई प्रभावशाली वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामले अभी न्यायिक परीक्षण के दौर में हैं. अदालतें इन मामलों की नियमित निगरानी कर रही हैं और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई आगे बढ़ रही है. आने वाले महीनों में कई मामलों में महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं.
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