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Explainer: उत्तर कोरिया वाले किम जोंग उन की जापान से क्यों बढ़ रही है नाराजगी? | Why North Korea kim jong un angry on Japan



उत्तर कोरिया के किम जोंग उन इन दिनों नाराज हैं. नाराजगी सबसे ज्यादा जापान से है. वजह है कि जापान सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ सुरक्षा संबंध बढ़ा रहा है. उत्तर कोरिया का कहना है कि इससे इलाके में स्थिरता को खतरा है. जुलाई की शुरुआत से किम का सरकारी मीडिया एक दर्जन से ज्यादा बार जापान की आलोचना कर चुका है. मगर लगातार अपने मिसाइल परीक्षणों पर चुप्पी साधे हुए है. इससे प्योंगयांग के बड़े रणनीतिक संदेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

जापान से क्या नाराजगी?

उत्तर कोरिया के बयानों में जापान की जवाबी हमले की क्षमता हासिल करने, अमेरिका में बनी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के परीक्षण, रक्षा खर्च में बढ़ोतरी और टोक्यो के सालाना रक्षा श्वेत पत्र (डिफेंस व्हाइट पेपर) को निशाना बनाया गया है. पिछले हफ्ते, नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन किम यो जोंग ने चेतावनी दी कि अगर जापान एक सैन्य ताकत के तौर पर खुद को बदलता है, तो वे “और सैन्य विकल्प” अपना सकते हैं.

जापान ऐसा क्या कर रहा है?  

चीन, रूस और उत्तर कोरिया से बढ़ते सुरक्षा खतरों का सामना करने के लिए जापान ने 2022 में अपने रक्षा खर्च को GDP के 2% तक दोगुना करने की योजना की घोषणा की थी. इस विस्तार के एक बड़े हिस्से में लंबी दूरी की मिसाइलों, जैसे कि अमेरिका में बनी ‘टोमाहॉक’ (Tomahawk)पर खर्च करना शामिल है. ये मिसाइलें 1,000 किलोमीटर (621 मील) से ज्यादा दूर के लक्ष्यों को निशाना बना सकती हैं.

उम्मीद है कि प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की सरकार इस साल जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में बदलाव करेगी. कुछ जानकारों का मानना ​​है कि इस कदम से रक्षा खर्च में और बढ़ोतरी होगी, जिसमें ड्रोन और हथियारों का उत्पादन भी शामिल है. मगर जानकारों का कहना है कि जापान इस कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है. सियोल की इव्हा वूमेंस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पार्क वॉन-गोन ने कहा कि मुख्य मकसद पूर्वोत्तर एशिया को विरोधी गुटों के बीच मुकाबले के तौर पर पेश करना है.

पार्क ने कहा, “सबसे बड़ा मकसद अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान बनाम उत्तर कोरिया-चीन-रूस का ढांचा तैयार करना है.”

उत्तर कोरिया क्या चाहता है?

जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया इस इलाके को एक-दूसरे के विरोधी गुटों के तौर पर दिखाना चाहता है, जिसमें एक तरफ प्योंगयांग, बीजिंग और मॉस्को हैं और दूसरी तरफ वॉशिंगटन, सियोल और टोक्यो. उनका कहना है कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान के सहयोग को एक बढ़ते हुए खतरनाक सैन्य और परमाणु गठबंधन के तौर पर दिखाने से प्योंगयांग को अपने हथियारों के प्रोग्राम को सही ठहराने, चीन और रूस का समर्थन मजबूत करने और यह तर्क देने में मदद मिलती है कि बिगड़ते सुरक्षा माहौल में उसका परमाणु जखीरा एक जरूरी जवाब है.

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