

भारत का नक्शा उठाकर देखें तो सैकड़ों जिले नजर आते हैं, लेकिन गुजरात का एक जिला ऐसा है जिसका फैलाव देखकर कोई भी दंग रह जाए. नाम है कच्छ. क्षेत्रफल के लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा जिला है. इसका आकार कितना बड़ा है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि देश की राजधानी दिल्ली से यह करीब 31 गुना बड़ा है. बात सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, दुनिया के कई जाने-माने मुल्क भी इसके सामने छोटे साबित होते हैं.
कई राज्यों और देशों से भी बड़ा भूभाग
कच्छ का कुल क्षेत्रफल करीब 45,674 वर्ग किलोमीटर है. इसका मतलब यह हुआ कि हरियाणा, केरल और गोवा जैसे पूरे के पूरे राज्य इसमें आसानी से समा सकते हैं. अकेले गुजरात के कुल क्षेत्रफल का लगभग 23 फीसदी हिस्सा इसी एक जिले में आता है. अगर दुनिया के नक्शे पर नजर डालें, तो स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, डेनमार्क और भूटान जैसे देश भी जमीन के मामले में कच्छ से छोटे हैं.
सफेद नमक का जादुई रेगिस्तान
कच्छ की पहचान सिर्फ उसकी जमीन के आकार से नहीं, बल्कि कुदरत के अनोखे मिजाज से भी है. यहां का ‘ग्रेट रन ऑफ कच्छ’ दुनिया के चुनिंदा सफेद रेगिस्तानों में गिना जाता है. मानसून के दिनों में यह पूरा इलाका पानी में डूब जाता है. लेकिन जैसे ही पानी सूखता है, मीलों दूर तक जमीन पर नमक की चमकदार सफेद चादर बिछ जाती है. सर्दियों में यही इलाका पर्यटकों, फोटोग्राफरों और सांस्कृतिक आयोजनों का बड़ा केंद्र बन जाता है.
5000 साल पुराना इतिहास
कच्छ की मिट्टी सिर्फ रेगिस्तान नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी सभ्यता की गवाह है. यहां स्थित धोलावीरा हड़प्पा कालीन प्राचीन नगरी है, जो अपनी बेजोड़ टाउन प्लानिंग और पानी सहेजने की उन्नत तकनीक के लिए यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. वहीं इस जिले का मुख्यालय भुज अपने ऐतिहासिक महलों, हेरिटेज और पारंपरिक हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है, जहां से इस पूरे अंचल को करीब से समझा जा सकता है.
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दुर्लभ वन्यजीवों का ठिकाना है कच्छ
दूर से शांत और वीरान दिखने वाला यह इलाका जैव विविधता से भरपूर है. यहां का ‘जंगली गधा अभयारण्य’ दुनिया में दुर्लभ भारतीय जंगली गधों (जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘खुर’ कहा जाता है) का एकमात्र ठिकाना है. सर्दियों में यहां के वेटलैंड्स गुलाबी फ्लेमिंगो और विदेशी प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहते हैं.अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी कच्छ पीछे नहीं है. बड़े पैमाने पर नमक उत्पादन, खेती, पशुपालन, व्यापार और बंदरगाह इस इलाके की रीढ़ हैं. पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब होने के कारण सामरिक दृष्टि से भी यह जिला भारत के लिए बेहद अहम है.
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