
मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद आबकारी विभाग ने अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है. इसी कड़ी में छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिलों में विभाग ने ड्रोन कैमरों की मदद से बड़ी कार्रवाई की है. टीम ने ड्रोन से दुर्गम इलाकों और जंगलों में निगरानी कर अवैध शराब बनाने के ठिकानों की पहचान की. इसके बाद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई. दोनों जिलों में कुल 24 मामले दर्ज किए गए हैं.
इस कार्रवाई में 160.65 लीटर अवैध शराब और 9,730 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त किया गया. विभाग ने जब्त महुआ लाहन को मौके पर ही नष्ट कर दिया. पूरी जब्ती की अनुमानित कीमत 9 लाख 89 हजार 60 रुपये बताई गई है.
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छिंदवाड़ा में 18 और पांढुर्णा में 6 मामले दर्ज
आबकारी विभाग के मुताबिक, छिंदवाड़ा जिले में सबसे ज्यादा कार्रवाई की गई. यहां कुल 18 मामले दर्ज किए गए. टीम ने 105.65 लीटर अवैध शराब और 6,730 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त किया.
इसकी अनुमानित कीमत 6 लाख 83 हजार 560 रुपये है. इस दौरान मोहन सिंधी, पूजा सूर्यवंशी, गोपाल ठाकुरिया, लक्ष्मीबाई धुर्वे, हरपति डेहरिया और शिवराम वर्मा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई.
वहीं, पांढुर्णा जिले में आबकारी विभाग ने 6 मामले दर्ज किए. यहां से 55 लीटर अवैध शराब और 3,000 किलोग्राम महुआ लाहन बरामद किया गया. इसकी कीमत करीब 3 लाख 5 हजार 500 रुपये आंकी गई है.
ढाबों और शराब दुकानों की भी हुई जांच
अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए विभाग ने सिर्फ जंगलों और गांवों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी. दोनों जिलों की 16 मदिरा दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया. इसके अलावा रात में गश्त के दौरान छिंदवाड़ा के बिज्जू ढाबा और पांढुर्णा के सेंटरपॉइंट व बालाजी ढाबा की भी जांच की गई.
विभाग की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं ढाबों और होटलों की आड़ में अवैध शराब की बिक्री तो नहीं हो रही है. मदिरा दुकानों पर क्यूआर कोड की स्कैनिंग भी की जा रही है. साथ ही संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही है.
जहरीली शराब की घटनाओं के बाद बढ़ाई सख्ती
आबकारी निरीक्षक नागेश नागेंद्र ने बताया कि सागर और देवास जिलों में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद सरकार के निर्देश पर यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है. कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिंह के आदेश और सहायक आबकारी आयुक्त वी.आर. वैद्य के मार्गदर्शन में कार्रवाई की जा रही है.
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उन्होंने बताया कि ड्रोन तकनीक की मदद से नदी-नालों और गांवों के आसपास छिपाकर रखे गए कच्ची शराब बनाने के ठिकानों की पहचान की जा रही है. विभाग का कहना है कि लोगों को जहरीली शराब से बचाने और अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा.