मध्य प्रदेश

केन-बेतवा परियोजना के विरोध में आदिवासी महिलाओं का फांसी सत्याग्रह, नदी किनारे चल रहा है आंदोलन


छतरपुर में मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी 44,605 करोड़ रुपये की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में नए तरीके से आंदोलन शुरू हो गया है. प्रभावित आदिवासी महिलाओं ने आंदोलन को नया रूप देते हुए प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ शुरू कर दिया है. 

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने गले में फांसी का फंदा डालकर सरकार से मांग की कि यदि उन्हें उचित पुनर्वास और न्याय नहीं मिल सकता, तो इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए. कूपी गांव के पास बराना नदी किनारे चल रहा इस आंदोलन का आज 10वां दिन है.

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पहले जल और चिता सत्याग्रह, अब फांसी सत्याग्रह

इससे पहले परियोजना प्रभावित परिवार जल सत्याग्रह और चिता सत्याग्रह भी कर चुके हैं. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले पांच दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उनका आरोप है कि प्रशासन ने अप्रैल में किए गए आश्वासन अब तक पूरे नहीं किए हैं.

विस्थापन, आजीविका और पहचान खोने का आरोप

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना के कारण हजारों परिवारों की जमीन, जंगल, जल स्रोत, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान छिन गई है. उनका आरोप है कि कई परिवारों को अवैध रूप से बेदखल किया गया, झूठे मुकदमे दर्ज किए गए और बिजली कनेक्शन तक काट दिए गए. साथ ही परियोजना प्रभावितों की सूची तैयार करने में भी अनियमितताएं बरती गईं. उनका दावा है कि मैनारी गांव के 114 लोगों के नाम अब भी सूची में शामिल नहीं किए गए हैं.

प्रशासन बोला- मांगों पर हो रहा काम

छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा कि अधिकारियों की प्रदर्शनकारियों से लगातार बातचीत चल रही है. उनके अनुसार अप्रैल में उठाई गई अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है. उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में राहत एवं पुनर्वास पैकेज में वृद्धि को मंजूरी दी है, लेकिन अब प्रदर्शनकारी इससे अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना है, जिसकी अनुमानित लागत 44,605 करोड़ रुपये है. परियोजना का उद्देश्य 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना और 130 मेगावाट बिजली उत्पादन करना है.

हालांकि प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना बांध निर्माण शुरू करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने सरकार से पारदर्शी पुनर्वास, प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक करने और ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करने की मांग की है.

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