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ऋषि कपूर का सुपरहिट शिव गीत, 35 साल से बना है कांवड़ यात्रा की शान, किशोर कुमार के बेटे ने दी आवाज, असद भोपाली ने बनाया सदाबहार | rishi kapoor superhit 35 year old song kanwar yatra favourite amit kumar sang asad bhopali lyrics made it evergreen



सावन का महीना आते ही देशभर में कांवड़ यात्रा की रौनक देखने को मिलती है. लाखों शिव भक्त गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार, गंगोत्री और दूसरे पवित्र घाटों तक पहुंचते हैं. कोई पैदल चलता है तो कोई ट्रक, बाइक या अन्य वाहनों से यात्रा पूरी करता है. इस दौरान पूरा रास्ता भोलेनाथ के जयकारों और शिव भजनों से गूंजता रहता है. कांवड़ यात्रा में डीजे की भी खास भूमिका होती है, जिस पर बजने वाले कुछ गाने वर्षों से श्रद्धालुओं की पहली पसंद बने हुए हैं. इन्हीं में एक गीत ऐसा भी है, जो पिछले करीब 35 साल से कांवड़ियों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय है और हर सावन इसकी धुन सुनाई देती है.

कांवड़ यात्रा में आज भी गूंजता है ये गीत

कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर सबसे ज्यादा बजने वाले गीतों में ‘पीकर शंकर जी की बूटी…’ का नाम शामिल है. साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘रणभूमि’ का यह गाना आज भी शिव भक्तों के बीच खास पहचान रखता है. फिल्म में यह गीत अभिनेता ऋषि कपूर पर फिल्माया गया था. सावन के महीने में जैसे ही यह गाना बजता है, कांवड़िए झूम उठते हैं और पूरे उत्साह के साथ अपनी यात्रा का आनंद लेते हैं. यही वजह है कि यह गीत हर साल कांवड़ यात्रा की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा बना रहता है.

किशोर कुमार के बेटे ने दी थी आवाज

इस लोकप्रिय गीत को मशहूर गायक अमित कुमार ने अपनी आवाज दी थी. अमित, हिंदी सिनेमा के दिग्गज पार्श्व गायक किशोर कुमार के बेटे हैं. इस गाने में उनकी गायकी इतनी प्रभावशाली है कि कई लोगों को पहली बार सुनने पर किशोर कुमार की आवाज का एहसास होता है. वहीं, गीत के महिला संस्करण को प्रसिद्ध गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने गाया था. दोनों गायकों की आवाज ने इस गीत को अलग पहचान दिलाई और यह समय के साथ शिव भक्तों का पसंदीदा बन गया.

मुस्लिम गीतकार ने लिखे थे बोल

इस गीत से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह भी है कि इसके बोल मशहूर शायर और गीतकार असद भोपाली ने लिखे थे, जिनका असली नाम असदुल्लाह खान था. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों के लिए करीब 400 गीत लिखे. भगवान शिव को समर्पित इस गीत के बोल भी उन्होंने ही रचे थे. उनकी सरल और असरदार लेखनी ने इस गाने को खास बना दिया. यही कारण है कि तीन दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ‘पीकर शंकर जी की बूटी…’ कांवड़ यात्रा की पहचान बने गीतों में गिना जाता है.

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