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उम्र संबंधी समस्या से जूझ रहे हैं 84 साल के अमिताभ बच्चन, जिम जाने पर बोले- ‘बूढ़े आदमी’ को अंदर न आने दें | Amitabh bachchan talks about sleep struggles getting back to gym routine Do npt let the old man in



नई दिल्ली:

अमिताभ बच्चन ने नींद न आने की अपनी समस्या, जिम रूटीन पर वापस लौटने की कोशिशों और इस बात पर चर्चा की है कि कैसे उनका मन तो व्यायाम करने के लिए तैयार रहता है, लेकिन उनका शरीर कभी-कभी उन्हें थोड़ा धीमा होने के लिए कहता है. उन्होंने अपने ब्लॉग पर अपनी सुबह की दिनचर्या के बारे में बताया. उन्होंने लिखा कि ब्लॉग लिखते समय उन्हें फॉन्ट का आकार (font size) सेट करने में काफी परेशानी हुई और ब्लॉग पूरा करने के ख्याल से वे सुबह जल्दी उठ गए. उन्होंने लिखा, “ब्लॉग लिखते समय अभी भी फॉन्ट के आकार को लेकर संघर्ष कर रहा हूं… अगर किसी को पता हो कि इसे कैसे ठीक करते हैं, तो कृपया बताएं… गूगल पर भी देखा, लेकिन निर्देश समझ नहीं आए.

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 आज थोड़ा जल्दी उठ गया, क्योंकि मन में यही चल रहा था कि मुझे कल रात ही ब्लॉग लिख लेना चाहिए था. इसलिए उठ गया हूं और उम्मीद कर रहा हूं कि शायद फिर से नींद आ जाए… अगर आ सके तो.” “कभी-कभी इंटरनेट पर नींद लाने के लिए कई तरह के शारीरिक तरीके बताए जाते हैं… मैंने सब आजमा लिए, लेकिन कुछ काम नहीं आया. इसलिए सबसे अच्छा यही है कि प्राकृतिक तरीके से सोया जाए – चादर या कंबल में अच्छे से लिपटकर, बिल्कुल वैसे ही जैसे हम दुनिया में आने से पहले मां के गर्भ में सिकुड़कर रहते थे… और बस, काम हो गया… खर्राटे वगैरह शुरू… आहा… एक जम्हाई आई… जो शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत है… तो अब सोने चलता हूं.”

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उन्होंने बताया कि उनका वर्कआउट रूटीन फिलहाल रुक गया है. ‘खुद में बुढ़ापे को हावी न होने दें’ (Don’t let the old man in) वाली बात का जिक्र करते हुए, बिग बी ने कहा कि फिट रहना कहने में आसान है, लेकिन करने में मुश्किल. फिर भी कोशिश करते रहना चाहिए. उन्होंने लिखा, “जिम जाने का रूटीन थोड़ा बिगड़ गया है, इसलिए इसे वापस पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा हूं. काम का इतना दबाव होता है कि शरीर और दिमाग दोनों थक जाते हैं, इसलिए थोड़ा और ध्यान देने की जरूरत है. मन तो कहता है ‘हां’, लेकिन शरीर कहता है – ‘जरा रुको दोस्त, खुद में बुढ़ापे को हावी मत होने दो’. यह कहना आसान है, पर करना मुश्किल… फिर भी करना तो है ही… तो मैं इसे जरूर करूंगा.”
 




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