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अयोध्या के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए कारसेवा? किस रणनीति पर आगे बढ़ रहे साधु-संत | After Ayodhya Kar Seva for the Shri Krishna Janmabhoomi



श्रीराम जन्मभूमि की तर्ज पर अब मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि में भी कारसेवा का ऐलान संतों की तरफ से किया गया है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान के तहत संत समाज ने 9 अगस्त को मथुरा में कारसेवा का आह्वान किया है. कारसेवा को लेकर क्या है संत समाज की योजना, इस पर एनडीटीवी ने चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज जी से बात की

चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस में कहा कि अब श्री कृष्ण के लिए कुछ होना चाहिए. हमें लगा कि जो संतों और भक्तों का भाव है वही भाव मुख्यमंत्री का है. श्री कृष्ण जन्मभूमि को लेकर बार-बार बाधा लगाए जा रहे हैं, हमें लगा कि वही स्थिति बनाने की कोशिश की जा रही है इसीलिए कार सेवा का निर्णय लिया गया. 

उन्होंने आगे कहा कि जो अयोध्या में किया गया अब वही ब्रज में करना पड़ेगा क्योंकि अब बहुत दिनों तक हम इंतजार नहीं कर सकते कि हमारे अपने श्री कृष्ण लला अपनी जन्म स्थान पर विराज ना हो पाए. कारसेवा से किसी भी प्रकार का माहौल नहीं बिगड़ेगा. विपक्ष के लोग सुप्रीम कोर्ट को उलझाने का काम कर रहे हैं, उनके पास एक भी साक्ष्य मौजूद नहीं है.

सच्चिदानंद जी महाराज ने इस बात पर जोर दिया कि समस्त भूमि मंदिर की है, सारे पेपर मंदिर के हैं. ईदगाह में गुंबज का निर्माण कैसे हो सकता है? इनके पास ना बिजली, न पानी और ना ही नगर निगम का बिल है. हाल ही में जो रेलवे ने मुआवजा दिया है वह भी मंदिर के पास गया है. यह लोग वरशिप 1991 का हवाला देकर हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और वहां पर मामला उलझा दिया.

उन्होंने आगे बोला कि हमारे खिलाफ यह काला कानून बनाया गया है जिसने पूरी व्यवस्था को बिगाड़ दिया है. हमारे सभी मंदिर इसी वजह से समस्या में खड़े हैं. वरशिप 1991 का काला कानून खत्म होना चाहिए. जब तक यह कानून खत्म नहीं होगा तब तक हिंदू हमेशा ऐसे ही प्रताड़ित होता रहेगा. राम मंदिर के समय में भी हम लोगों ने ऐसे ही कारसेवा की थी और उस वक्त भी सुप्रीम न्यायालय में मामला लंबित था. उस वक्त भी यह दिख रहा था कि जब तक गुंबज नहीं हटेगा तब तक कार्य नहीं होगा. वहां पर भी कारसेवा की गई और सारे हिंदू संगठनों ने एकता दिखाइए.

अयोध्या से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि 1992 में एक शेर आया, उसके सामने कारसेवा की गई और गुंबज को धराशाई किया गया. भारत में आज एक योगी विराजमान है, वह खुद धर्माचार्य हैं. अब वह समय आ गया है कि कारसेवा के माध्यम से इस गुंबज को हटाया जाए. गुंबज गिराकर शीघ्र ही वहां पर भव्य मंदिर का निर्माण किया जाए. हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रतीक्षा कर लेंगे लेकिन गुंबज को हटना चाहिए. हमारी बात चल रही है हम 1991 की वरशिप एक्ट को भी चुनौती देंगे.

वे कहते हैं कि इस कानून में कहां लिखा है कि आप सर्वे नहीं कर सकते हैं? पुरातत्व विभाग से इसका सर्वे करना चाहिए. अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में देरी होगी तो हम विवश होंगे और इस गुंबज को धराशाही करेंगे.हमें देशभर के संतो, अखाड़े का समर्थन प्राप्त है.सभी कारसेवा के लिए तैयार हैं और इसको लेकर देश भर में बैठकर चल रही है.जिन लोगों के पूर्वज राम और कृष्ण की अनुयाई थे उनको अब भाईचारा निभाना का समय आ गया है.

महाराजी के मुताबिक उनके पूर्वज भगवान की पूजा करते थे लेकिन जब मुग़ल आए तो उन्होंने धर्म परिवर्तन कर दिया ऐसे में अब उन्हें आगे आकर इस मंदिर निर्माण के लिए खुशी-खुशी बात करनी चाहिए. वह लोग वापसी भले न करें लेकिन हमारे प्रभु को वापस कर दें. कारसेवा रद्द करने की शर्त बताते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एक फैसला कर दे कि प्रतिदिन सुनवाई होगी, फास्ट्रेक कोर्ट बनेगी और जल्दी ही निर्णय आएगा

 उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा संभव हो जाए तो हम लोग आज ही अपनी कारसेवा रद्द कर देंगे. अगर न्यायालय और प्रशासन ऐसा आश्वासन नहीं देगा तो कारसेवा निश्चित होगी.देखिए अगर अधिकार मिलेंगे नहीं तो हमें छिनने पड़ेंगे.हम कब तक भिक्षा मांगने के लिए कोर्ट के पास जाएं.दुनिया जानती है कि कृष्णलला मथुरा में जन्मे थे.

 महाराज जी ने तंज कसते हुए कहा कि इनके अल्लाह क्या मथुरा में जन्मे थे? इनके पीर पैगंबर क्या मथुरा में जन्मे थे? क्या अयोध्या और काशी में जन्मे थे? जब नहीं जन्मे थे तो उन्होंने कैसे आकर यहां पर मस्जिद का निर्माण कर लिया वह भी मंदिर के बराबर में. आरएसएस अलग तरीके से काम करता है वह हमें किस प्रकार से समर्थन करेगा, वह उसका अलग तरह से कार्य होता है.
 




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