
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा बयान आया है. एमपी विधानसभा में 20 जुलाई से मानसून सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें यूसीसी का विधेयक पेश किए जाने की संभावना है. इस बीच सीएम मोहन यादव ने कहा कि देश में अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग कानून नहीं हो सकते. अगर रामचंद्र नामक कोई व्यक्ति एक शादी करता है, तो रहीम नाम के किसी शख्स से भी एक ही शादी की अपेक्षा की जा सकती है.
दरअसल, मोहन यादव इंदौर के जिला चिकित्सालय के 300 बिस्तरों वाले नए भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे. इस भवन के निर्माण में 83.13 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
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‘अभी तक हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए कायदे अलग’
मोहन यादव ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने प्रदेश भर में यूसीसी पर सभी धर्मों, सभी वर्गों और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों से संवाद किया था. इसमें 10 लाख से अधिक नागरिकों के सुझाव लिए गए थे. फिलहाल, विवाह और उत्तराधिकार जैसे मामलों में हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए कानून-कायदे अलग-अलग हैं.
सीएम का कहना है, “जब हमारा देश एक है, तो अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए अलग-अलग कानून क्यों होने चाहिए? अगर रामचंद्र नामक कोई व्यक्ति एक शादी करता है, तो रहीम नाम के किसी शख्स से भी एक ही शादी की अपेक्षा की जा सकती है.”
कांग्रेस पर भी सीएम मोहन यादव का निशाना
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रमुख विपक्षी दल हमेशा ऐसे विषयों को ‘हिंदू-मुसलमान’ के नजरिये से देखता है. मैं जिम्मेदारी के साथ कहना चाहूंगा कि यूसीसी पर भी कांग्रेस ने हमेशा की तरह दोहरा रवैया अख्तियार किया. कांग्रेस अपने वोट बैंक की चिंता के चलते इस समिति की बैठक में शामिल नहीं हुई और उसने यूसीसी पर अपना मत जाहिर नहीं किया. यही कारण है कि यूसीसी हो या धार की भोजशाला, दोनों विषयों से कांग्रेस मुंह चुराती है.
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