मध्य प्रदेश

VIDEO: इंदौर में सड़क फटी, बहने लगा पानी, गुणवत्ता पर उठे सवाल


इंदौर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई आदर्श सड़क की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री तक बनाई गई इस सड़क पर पानी की पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान गोराकुंड चौराहे पर सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया. 

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सड़क फूटकर पानी का तेज बहाव बाहर आता दिखाई दे रहा है. इस घटना के बाद करोड़ों रुपए की लागत से हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं.

पाइपलाइन की प्रेशर टेस्टिंग के दौरान धंसी सड़क!

दरअसल इंदौर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री तक सड़क का निर्माण आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाओं के साथ किया गया था. सड़क के नीचे पानी, सीवर और अन्य यूटिलिटी लाइनों का नेटवर्क भी तैयार किया गया है. लेकिन सोमवार (17 अगस्त) सुबह जब पानी की पाइपलाइन की प्रेशर टेस्टिंग की जा रही थी, तभी अचानक दबाव बढ़ने पर पाइपलाइन के आसपास का हिस्सा धंस गया और देखते ही देखते सड़क के नीचे से तेज गति से पानी बाहर निकलने लगा. 

अचानक सड़क धंसने और पानी निकलने से घबरा गए लोग

अचानक हुई इस घटना से वहां से गुजर रहे वाहन चालक और राहगीर घबरा गए. जिस सड़क को लंबे समय तक टिकाऊ और शहर के लिए आदर्श मॉडल बताया जा रहा था, वह अपनी पहली बड़ी तकनीकी परीक्षा में ही कमजोर साबित होती नजर आई.

अधिकारियों की जवाबदेही कैसे होगी तय?

वहीं घटना सामने आने के बाद निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सिर्फ पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान ही सड़क की सतह और उसके नीचे की संरचना प्रभावित हो गई, तो भविष्य में भारी बारिश, लगातार भारी वाहनों के आवागमन या किसी अन्य यूटिलिटी कार्य के दौरान इसकी स्थिति क्या होगी?

स्मार्ट सिटी के ज्यादातर कार्य की गुणवत्ता पर सवाल!

उधर, इस पूरे मामले में नगर निगम की एमआईसी सदस्य और जानकारी समिति प्रभारी राजेंद्र राठौड़ ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत किए गए विकास कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत से हुए स्मार्ट सिटी के अधिकांश कार्य शुरू से ही गुणवत्ता को लेकर विवादों में रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि पहले भी कई बार तत्कालीन महापौर और नगर निगम कमिश्नर को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अवगत कराया था, लेकिन कार्रवाई केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रही.

निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग

उनका आरोप है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में यह निर्माण हुआ, वे बाद में ट्रांसफर लेकर इंदौर से चले गए और अब उसकी कीमत शहर की जनता चुका रही है. उन्होंने यह भी कहा कि जिस सड़क पर चार वर्ष पहले करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे, उस पर नगर निगम को बार-बार डामरीकरण करना पड़ रहा है, जो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है. 

राठौड़ ने पूरे मामले में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र लिखकर निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है.

नगर निगम और निर्माण एजेंसी के सामने क्या चुनौती?

फिलहाल नगर निगम और निर्माण एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के साथ-साथ पूरी परियोजना की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराना है. क्योंकि यदि टेस्टिंग के दौरान ही करोड़ों रुपए की सड़क टूट रही है, तो यह केवल एक तकनीकी खामी नहीं बल्कि निर्माण प्रक्रिया पर भी बड़ा सवाल है. अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होती है या फिर यह मामला भी सिर्फ जांच और नोटिस तक ही सीमित रह जाता है.

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