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Swiggy-Zomato पर खाना ऑर्डर करना सस्‍ता हो सकता है, जिम जाने वालों को क्‍या मिलेगी राहत, GST काउंसिल के पास EV पर भी प्रस्‍ताव | Swiggy-Zomato Online order to be Cheaper as Delivery Charges May Get 5 percent GST Council Meeting ITC for Gym Hotel Rare Disease Medicines


GST काउंसिल की 8 अक्‍टूबर को होने वाली मीटिंग को लेकर सबकी उम्‍मीदें बंधी हुई हैं. खासकर Gen-Z युवाओं को इस बार कुछ राहतें मिल सकती हैं. उम्‍मीद जताई जा रही है कि स्विगी, जोमैटो, बिस्‍ट्रो, टूइंग जैसी फूड डिलीवरी कंपनियों की डिलीवरी फीस पर GST कम किया जा सकता है. 5% GST देने वाले होटल, जिम, फिटनेस सेंटर को भी ITC यानी इनपुट टैक्‍स क्रेडिट की सुविधा देने का प्रस्‍ताव विचाराधीन है. ऐसा होता है तो युवाओं को ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना और जिम जाना थोड़ा सस्‍ता पड़ सकता है.  

NDTV Profit की श्रिमी चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हेल्थकेयर, डिफेंस और कृषि क्षेत्र को राहत देने और कई मामलों में इनपुट टैक्‍स क्रेडिट (ITC) को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के प्रस्ताव भी संभवत: एजेंडे में शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार, बैठक में GST रेट में व्यापक बदलाव एजेंडे में नहीं है, लेकिन अलग-अलग सेक्टर के लिए टारगेटेड टैक्स राहत और कंप्लायंस से जुड़े कई प्रस्तावों पर विचार हो सकता है.

ऑनलाइन फूड डिलीवरी फीस पर 5% GST का प्रस्ताव

ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने वाले ग्राहकों के लिए सबसे अहम प्रस्ताव डिलीवरी चार्ज से जुड़ा है. GST काउंसिल सभी गुड्स डिलीवरी सर्विस पर एक समान 5% GST लागू करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है.

फिलहाल प्लेटफॉर्म के जरिए तैयार और डिलीवर होने वाले खाने पर 5% GST लगता है, लेकिन ग्राहक से अलग से लिया जाने वाला डिलीवरी चार्ज 18% GST स्लैब में आता है.

अगर डिलीवरी फीस को भी 5% GST के दायरे में लाया जाता है, तो बिलिंग व्यवस्था आसान होगी और ऑनलाइन फूड ऑर्डर की कुल लागत में मामूली कमी आ सकती है.

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होटल, जिम और रेस्टोरेंट को ITC की राहत?

हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की लंबे समय से चली आ रही मांग पर भी चर्चा हो सकती है. 5% GST देने वाले होटल, फिटनेस सेंटर और रेस्टोरेंट को ITC की सुविधा देने का प्रस्ताव विचाराधीन है.

इससे इन कारोबारों के उन इनपुट खर्चों का टैक्‍स क्रेडिट मिल सकेगा, जिसे मौजूदा व्यवस्था में क्लेम नहीं किया जा सकता.

EV किराये और ट्रांसपोर्ट पर दो विकल्प

इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV से जुड़ी ट्रांसपोर्ट और रेंटल सर्विस के लिए भी GST व्यवस्था पर विचार हो सकता है. इसके लिए दो विकल्प सामने हैं, जिनमें से एक पर विचार किया जा सकता है. 

  • 5% GST और सीमित ITC
  • 18% GST और पूरा ITC

हालांकि, एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर GST घटाने की उम्मीद कम है. इनके लिए 18% GST जारी रहने की संभावना है. क्रूज टूरिज्म को भी फिलहाल 18% GST स्लैब में ही रखने का प्रस्ताव है.

7 और गंभीर बीमारियों की दवाओं पर GST छूट

हेल्थकेयर सेक्टर के लिए भी बैठक में राहत का प्रस्ताव है. 7 और रेयर डिजीज को ऐसी बीमारियों की सूची में शामिल किया जा सकता है, जिनके इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं और मेडिकल ट्रीटमेंट पर GST से छूट दी जाती है.

इससे महंगे इलाज का खर्च उठाने वाले मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिल सकती है.

जय जवान-जय किसान: डिफेंस और खेती के लिए भी राहत? 

डिफेंस सेक्टर में मिसाइल पार्ट्स, स्पेयर और टेस्टिंग इक्विपमेंट के आयात और सप्लाई पर IGST छूट बढ़ाने का प्रस्ताव है. इसका उद्देश्य डिफेंस प्रोडक्शन और ऑपरेशनल जरूरतों को समर्थन देना है.

वहीं, बीजों के वेयरहाउसिंग और स्टोरेज सर्विस पर पूरी GST छूट देने पर भी विचार हो सकता है. इससे किसानों के लिए स्टोरेज लागत कम करने और कृषि सप्लाई चेन को मजबूत करने की कोशिश होगी.

NBFC और बैंक की को-लेंडिंग पर स्थिति होगी साफ

वित्तीय क्षेत्र में NBFC और कमर्शियल बैंकों के बीच को-लेंडिंग व्यवस्था पर GST ट्रीटमेंट स्पष्ट करने का प्रस्ताव है.

खास तौर पर सर्विस फीस और ब्याज की हिस्सेदारी को लेकर टैक्स वर्गीकरण की स्थिति साफ करने पर विचार हो सकता है.

वहीं, म्यूचुअल फंड और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के इन्वेस्टर अवेयरनेस प्रोग्राम को मौजूदा GST व्यवस्था के तहत ही जारी रखने की संभावना है.

शिपिंग और सीफरर्स के लिए भी छूट

विदेशी शिपिंग लाइनों को दी जाने वाली कुछ सेवाओं पर IGST छूट देने का प्रस्ताव है. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग से जुड़े कारोबार में टैक्स की अतिरिक्त परत को कम करना है.

इसके अलावा SPFO (Seamen’s Provident Fund Organisation) की ओर से दी जाने वाली सेवाओं को भी GST से छूट देने पर विचार हो सकता है. इससे इसे EPFO के समान व्यवस्था में लाने का रास्ता साफ हो सकता है.

फिटमेंट कमेटी की ओर से अंतिम रूप दिए गए प्रस्ताव बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्रियों के सामने रखे जाएंगे. काउंसिल की मंजूरी के बाद इन प्रस्तावों को लेकर औपचारिक नोटिफिकेशन जारी किए जाने की उम्मीद है.

यानी 8 अक्टूबर की बैठक में व्यापक GST रेट कट से ज्यादा फोकस सेक्टर-वार राहत, ITC की स्पष्टता, टैक्स छूट और कंप्लायंस को आसान बनाने पर रह सकता है.

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