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NDTV EXCLUSIVE: पाकिस्तान की जगह कुरान का दें हवाला, पॉलिगैमी विवाद के बाद बोलीं सना मलिक | NCP MLA Sana Malik Clarifies Remarks on Polygamy UCC Amid Maharashtra Assembly Row



मुंबई:

महाराष्ट्र विधानसभा में बहुविवाह (पॉलिगैमी), मुस्लिम पर्सनल लॉ और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर दिए गए बयान पर उठे राजनीतिक विवाद के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) विधायक सना मलिक ने NDTV से विशेष बातचीत की. इसमें उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और उसे राजनीतिक रूप से तोड़-मरोड़कर प्रचारित किया गया. सना मलिक ने कहा कि उनका विरोध महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को धर्म से जोड़ने को लेकर था, न कि किसी विशेष कानून या समुदाय के समर्थन अथवा विरोध को लेकर.

पाकिस्तान की जगह कुरान का हवाला क्यों नहीं दिया

सना मलिक ने कहा कि विधानसभा में चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक देवयानी फरांदे ने पाकिस्तान का संदर्भ दिया था. इसी पर उन्होंने आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा,”मेरा विरोध इस बात को लेकर था कि महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक देवयानी फरांदे द्वारा पाकिस्तान का जो संदर्भ दिया गया था, उस पर मुझे आपत्ति थी. मैंने कहा था कि आप पाकिस्तान का हवाला क्यों दे रही हैं? आपको कुरान का हवाला देना चाहिए, जिसके आधार पर पाकिस्तान में कानून बनाए गए हैं.”

सना मलिक ने जोर देकर कहा कि भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए और न ही पाकिस्तान को किसी वैचारिक मॉडल के रूप में पेश किया जाना चाहिए. 

उन्होंने कहा, ”हां, मैंने कहा था कि बहुविवाह पर कानून कुरान के अनुसार होना चाहिए.” अपने बयान पर सफाई देते हुए सना मलिक ने स्वीकार किया कि उन्होंने विधानसभा में कहा था कि यदि बहुविवाह से संबंधित कोई चर्चा या कानून बनाने की बात हो, तो उस विषय पर इस्लामी शिक्षाओं के मूल स्रोत के आधार पर चर्चा होनी चाहिए.

उन्होंने कहा,”हां, मैंने कहा था कि अगर बहुविवाह (पॉलिगैमी) के संबंध में कोई कानून बनाना है, तो वह कुरान के अनुसार होना चाहिए. मैंने यही मांग की थी.” हालांकि बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें पूरी तरह पता है कि भारत में कानून संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बनाए जाते हैं, किसी धर्मग्रंथ के आधार पर नहीं.

योगेश कदम को दिया जवाब

गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने सना मलिक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कानून धार्मिक पुस्तकों के आधार पर नहीं बनाए जा सकते.

इस पर जवाब देते हुए सना मलिक ने कहा,”मुझे पता है कि कानून धर्म के आधार पर नहीं बनाए जा सकते. लेकिन जब पाकिस्तान का संदर्भ दिया जाता है और किसी विशेष धर्म को निशाना बनाया जाता है, तब हम उस धर्म में प्रचलित व्यवस्थाओं और परंपराओं की बात करेंगे.” उनका कहना है कि उनके बयान का संदर्भ समझे बिना केवल कुछ अंशों को प्रचारित किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी.

UCC पर क्या बोलीं सना मलिक

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए सना मलिक ने कहा कि इस विषय पर व्यापक और समावेशी चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने कहा,”जब समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की बात हुई, तब मैंने पूछा था कि क्या केवल मुस्लिम पुरुष ही बहुविवाह करते हैं? यह अन्य धर्मों में भी प्रचलित है.” उन्होंने कहा कि यूसीसी पर चर्चा का स्वागत है, लेकिन यह किसी एक समुदाय को निशाना बनाने वाली नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा,”यूसीसी पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और हम उसका स्वागत करते हैं, लेकिन वह सभी को साथ लेकर चलने वाली होनी चाहिए, किसी एक समुदाय को निशाना बनाने वाली नहीं.”

परिवार ने भी पूछा कि आखिर कहा क्या है

सना मलिक ने दावा किया कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसके कारण विवाद खड़ा हुआ. उन्होंने कहा,”मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और उसका गलत अर्थ निकाला गया. यहां तक कि मेरे परिवार वालों ने भी मुझसे पूछा कि आखिर मैंने ऐसा क्या कहा था?”

सना मलिक ने बीजेपी नेताओं द्वारा पाकिस्तान का संदर्भ दिए जाने पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा,”जो लोग पाकिस्तान का हवाला दे रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान जाना चाहिए. मैं क्यों जाऊं?” इस बयान के साथ उन्होंने दोहराया कि भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान से जोड़कर देखने की राजनीति बंद होनी चाहिए.

बयान राजनीतिक विवाद जारी

सना मलिक की सफाई के बावजूद उनका बयान महाराष्ट्र की राजनीति में बहस का विषय बना हुआ है. बीजेपी उनके बयान को लेकर लगातार हमलावर है, जबकि एनसीपी का कहना है कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधानसभा में शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में समान नागरिक संहिता, मुस्लिम पर्सनल लॉ और महिलाओं के अधिकारों पर व्यापक राजनीतिक चर्चा का रूप लेती है या नहीं.

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