

भारत में रहने वाले लोगों की सुबह चाय की चुस्की के साथ ही होती है. यह कोई ड्रिंक नहीं है भारतीयों के लिए एक इमोशन है. क्या आपको पता है भारत में रहने वाले लोग हमेशा से चाय के दीवाने नहीं थे. जानकारी के अनुसार, भारत में रहने वाले लोगों जिस चाय को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लिया है उसकी शुरुआत चीन के राजघरानों से हुई थी. फिर अंग्रेजों के माध्यम से चाय का स्वाद भारत आया. आइए जानतें है कि चाय का इतिहास और यह कैसे भारत के रहने वाले लोगों का फेवरेट ड्रिंक बन गया.
बिना चाय के भारत में नहीं होती सुबह
इतिहासकारों की मानें तो चाय लगभग 5 हजार साल पुरानी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 2737 ईसा पूर्व में चीन के एक राजा शेन नुंग एक पेड़ के नीचे बैठे थे. उनको जब प्यास लगी तो उन्होंने अपने सेवक से गर्म पानी लाने को कहा. जब सेवक उनके लिए पानी उबाल रहे थे, तभी एक तेज हवा चली और उस झोंके से उस पेड़ की कुछ पत्तियां उबलते पानी में गिर गईं. राजा को जड़ी-बूटियों का बहुत ज्ञान था, तो जब उन्होंने पानी में गलती से गिरी पत्तियों के काढ़े को चखा तो राजा को काफी पसंद आया. ऐसा कहा जाता है, उबलते पानी में जो पत्तियां गिरी थी वो चाय की थी. इसी तरह चाय की खोज हुई जो आज भी भारत के हर में बनाई जाती है, यहां आज बी बिना चाय के सुबह नहीं होती है.
बता दें कि करीब 19वीं शताब्दी की शुरुआत में चाय के व्यापार पर चीन की मोनोपोली खत्म होने के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंटिया कंपनी ने भारत में चाय का उत्पादन शुरू किया. असम और दार्जिलिंग में 1830 के दशक में अंग्रेजों ने बड़े पैमाने पर चाय के बागान लगाए. हालांकि, पहले शुरुआती दिनों में चाय का उत्पादन ब्रिटेन में निर्यात के लिए किया जाने लगा.
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भारतीयों की पहली पसंद कैसे बीनी ड्रिंक
जानकारों के अनुसार, शुरुआती दिनों में चाय सिर्फ इलीट वर्ग और अंग्रेजों की ड्रिंक बन घई, लेकिन आम लोगों को इसकी आदत लगवाने के लिए ब्रिटिशर्स ने कमाल की मार्केटिंग कैंपन का इस्तेमाल किया. पहले आने जाने के लिए रेल ही एक माध्यम हुआ करती थी. लोगों को चाय की आदत लगाने के लिए अंग्रेजों ने स्टेशन्स पर फ्री टी स्टॉल्स चालू करवाए, जहां लोगों को मुफ्त की चाय पिलाई. धीरे-धीरे ये ड्रिंक भारत में रहने वाले लोगों की भी पहली पसंद बन गई.
लोगों ने कैसे बदला चाय बनाने का तरीका
जब चाय की शुरुआत हुई थी तो यह बिना दूध और मसालों की होती थी, लेकिन भारत में रहने वाले लोगों ने इसका स्वाद अपने हिसाब से बदल लिया. उन्होंने चाय में दूध मिलाकर पीना शुरू किया. इस तरह चाय बनाने का तरीका आज भी इसी अंदाज में है.





