धर्म

Ashadha Gupt Navratri 2026: आज पुष्य नक्षत्र के महासंयोग में घटस्थापना, नोट कर लें सुबह का सबसे शुभ मुहूर्त और पूजा विधि


Ashadha Gupt Navratri 2026: सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. नवरात्रि के दिनों में देवी मां के नव स्वरूपों की पूजा आराधना की जाती है. साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें एक चैत्र नवरात्रि, दूसरा शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि शामिल हैं. तंत्र-मंत्र की साधना में लीन रहने वाले लोगों के लिए गुप्त नवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है.

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से आरंभ होकर 22 जुलाई को समाप्त होंगे. हालांकि, चतुर्थी तिथि का क्षय और नवमी तिथि की वृद्धि होने से गुप्त नवरात्रि का उत्थापन और व्रत पारण 23 जुलाई को होगा.

इन नवरात्रों में 10 महाविद्याओं की पूजा करने का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है. इस दौरान तंत्र विद्या का विशेष महत्व है. जब भी नवरात्रि बुधवार से प्रारंभ होती है, तो मां नौका (नाव) पर सवार होकर आती हैं. देवी भागवत पुराण के अनुसार, यह वाहन अच्छी वर्षा, समृद्धि और कृषि में उन्नति का प्रतीक है. माता रानी के भक्त गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं. इस दिन श्रद्धालु निराहार या फलाहार रहकर मां दुर्गा की अराधना करते हैं. प्रतिपदा तिथि में घर व मंदिर में कलश स्थापना की जाएगी.

साल में आती हैं चार नवरात्रि: 10 महाविद्याओं की साधना

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि का पावन त्योहार आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित माना गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साल भर में कुल चार नवरात्रि आते हैं. जिसमें से दो चैत्र व शारदीय और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं. आषाढ़ मास में पड़ने वाले नवरात्रि को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहा जाता है.

गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं:
 मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है. इस समय की गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली तथा चारों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को देने वाली होती है. इसका सबसे महत्वपूर्ण समय मध्य रात्रि से सूर्योदय तक अधिक प्रभावशाली बताया गया है. इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं.

देवी भागवत पुराण, दिन के अनुसार तय होता है मां दुर्गा का वाहन

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि यूं तो मां दुर्गा का वाहन सिंह को माना जाता है, लेकिन हर साल नवरात्रि के समय तिथि के अनुसार माता अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं. माता दुर्गा आती भी वाहन से हैं और जाती भी वाहन से हैं. देवीभाग्वत पुराण में जिक्र किया गया है:
शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे. गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥

इस श्लोक में सप्ताह के सातों दिनों के अनुसार देवी के आगमन का अलग-अलग वाहन बताया गया है:

  • सोमवार या रविवार: माता हाथी पर आएंगी.
  • शनिवार और मंगलवार: माता अश्व यानी घोड़े पर सवार होकर आती हैं.
  • गुरुवार या शुक्रवार: माता डोली या पालकी पर आती हैं.
  • बुधवार: माता नाव (नौका) पर आरुढ़ होकर आती हैं.

नवरात्रि का विशेष नक्षत्रों और योगों के साथ आना मनुष्य जीवन पर खास प्रभाव डालता है. ठीक इसी प्रकार कलश स्थापन के दिन देवी किस वाहन पर विराजित होकर पृथ्वी लोक की तरफ आ रही हैं, इसका भी मानव जीवन पर विशेष असर होता है.

नाव पर आगमन: भक्तों के कष्ट हरेंगी माता दुर्गा

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि में माता दुर्गा के वाहन का विशेष महत्व होता है. बुधवार से शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती हैं. देवी भागवत पुराण के अनुसार, यह वाहन अच्छी वर्षा, समृद्धि और कृषि में उन्नति का प्रतीक है. कृषि प्रधान महाकौशल अंचल के लिए इसे विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है.

मान्यता है कि माता का नौका पर आगमन भक्तों के कष्ट दूर करने के साथ खुशहाली का संदेश देता है. मां जगदंबे का नौका यानी नाव पर आगमन शुभ माना जाता है. नाव पर सवार होकर माता जब भी आती हैं, तब अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और सभी कष्ट हर लेती हैं.

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: महत्वपूर्ण तिथियां

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आरंभ बुधवार 15 जुलाई से हो रहा है.

  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 14 जुलाई को दोपहर 3:14 मिनट पर
  • प्रतिपदा तिथि समापन: 15 जुलाई को सुबह 11:52 मिनट पर
  • उदया तिथि के अनुसार शुरुआत: 15 जुलाई 2026 (बुधवार)
  • गुप्त नवरात्रि समापन (नवमी तिथि): 23 जुलाई 2026

नौ दिनों का तिथि कैलेंडर:

15 जुलाई 2026, बुधवार – पहला नवरात्र – घटस्थापना, मां शैलपुत्री की पूजा

16 जुलाई 2026, गुरुवार – दूसरा नवरात्र – मां ब्रह्मचारिणी पूजा

17 जुलाई 2026, शुक्रवार – तीसरा और चौथा नवरात्र – मां चन्द्रघण्टा और मां कूष्माण्डा की पूजा

18 जुलाई 2026, शनिवार – पांचवां नवरात्र – मां स्कन्दमाता पूजा

19 जुलाई 2026, रविवार – छठा नवरात्र – मां कात्यायनी पूजा

20 जुलाई 2026, सोमवार – सातवां नवरात्र – मां कालरात्रि पूजा

21 जुलाई 2026, मंगलवार – आठवां नवरात्र – दुर्गा अष्टमी, मां महागौरी पूजा

22 जुलाई 2026, बुधवार – नौवां नवरात्र – मां सिद्धिदात्री पूजा, महा नवमी

23 जुलाई 2026, गुरुवार – नवरात्रि व्रत का पारण

घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि प्रतिपदा तिथि में घट स्थापना यानी मां के आवाहन से ही नवरात्रि का अनुष्ठान शुरू होता है. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पर 15 जुलाई को ही घट स्थापना की जाएगी, जिसका शुभ मुहूर्त पुष्य नक्षत्र में होगा.

  • घटस्थापना का शुभ समय: सुबह 06:01 बजे से 10:17 बजे तक (15 जुलाई)
  • सर्वोत्तम समय (पुष्य नक्षत्र): सुबह 8:02 मिनट
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:11 से 4:52 बजे तक

15 जुलाई बुधवार को पुष्य नक्षत्र, हर्षण योग एवं सिद्ध योग के महासंयोग में गुप्त नवरात्र शुरू होगा. इस अवधि में पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है.

गुप्त नवरात्रि के अचूक उपाय

भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के दौरान निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

  • सुबह-शाम दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.
  • दोनों वक्त की पूजा में माता रानी को लौंग और बताशे का भोग लगाएं.
  • मां दुर्गा को केवल लाल रंग के पुष्प ही अर्पित करें.
  • मां दुर्गा के विशिष्ट मंत्र ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चे’ का सुबह-शाम 108 बार जप करें.
  • विशेष नियम: गुप्त नवरात्रि में अपनी पूजा और साधना के बारे में किसी बाहरी व्यक्ति को न बताएं.

गुप्त नवरात्रि के व्रत नियम

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि व्रत के दौरान इन नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए:

खान-पान: गुप्त नवरात्रि के दौरान मांस-मदिरा, लहसुन और प्याज का बिल्कुल सेवन नहीं करना चाहिए.

नारी सम्मान: मां दुर्गा स्वयं एक नारी हैं, इसलिए नारी का सदैव सम्मान करना चाहिए. जो नारी का सम्मान करते हैं, मां दुर्गा उन पर अपनी कृपा बरसाती हैं.

घरेलू शांति: नवरात्रि के दिनों में घर में कलेश, द्वेष या किसी का अपमान नहीं करना चाहिए; ऐसा करने से घर में बरकत नहीं होती.

स्वच्छता और वस्त्र: नौ दिनों तक सूर्योदय के साथ ही स्नान कर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए. नवरात्रि के दौरान काले रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए और न ही चमड़े के बेल्ट या जूते का उपयोग करना चाहिए.

अन्य नियम: मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए. साधक को बिस्तर की जगह जमीन पर सोना चाहिए. साथ ही, घर पर आए किसी मेहमान या भिखारी का अपमान नहीं करना चाहिए.

संपूर्ण पूजा सामग्री लिस्ट

कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास के अनुसार पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्रियां एकत्रित कर लें:

मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप, वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, आम के पत्तों का बंदनवार, लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, साबुत सुपारी, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, जौ, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, मिट्टी या पीतल का कलश, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सफेद और पीली सरसों, गंगाजल आदि.

सरल पूजा विधि:

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने कलश स्थापना और पूजा की विधि इस प्रकार बताई है:

सुबह जल्दी उठकर सभी कार्यों से निवृत्त होकर नवरात्र की सभी पूजन सामग्री को एकत्रित करें.

मां दुर्गा की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र से सजाएं.

मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं और नवमी तक प्रतिदिन हल्के पानी का छिड़काव करें.

शुभ मुहूर्त में पूर्ण विधि के साथ कलश स्थापित करें. पहले कलश को गंगाजल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और उस पर नारियल रखें. कलश को लाल कपड़े से लपेटकर कलावा (मौली) से बांधें और इसे मिट्टी के जौ वाले बर्तन के पास रख दें.

फूल, कपूर, अगरबत्ती और ज्योत के साथ माता की पूजा करें. नौ दिनों तक मां दुर्गा के मंत्रों का जाप कर सुख-समृद्धि की कामना करें.

अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें पूरी, चना, हलवा आदि व्यंजनों का भोग लगाएं.

आखिरी दिन दुर्गा पूजा के बाद घट विसर्जन करें. मां की आरती गाएं, उन्हें फूल-चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश उठाएं.

यह भी पढ़े- Shani Vakri 2026: जुलाई में शनि की वक्री चाल से मचेगी हलचल, पर इन 3 राशियों पर होगी पैसों की बरसात!

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button