

मध्य प्रदेश के रायसेन में खजाने के चक्कर में एक करोड़पति व्यापारी की कथित’बलि’ देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां के गैरतगंज से 6 दिनों से लापता सर्राफा कारोबारी विजय जैन का शव परासिया नदी किनारे मिट्टी में दफन मिला. पुलिस ने 24 घंटे के भीतर अंधविश्वास से जुड़े इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. बता दें कि एक चरवाहे की सूचना पर पुलिस ने नदी किनारे खुदाई कराकर शव बरामद किया. मौके से मिले मोबाइल और चप्पल से मृतक की पहचान चौक बाजार निवासी विजय जैन के रूप में हुई. पुलिस जांच में सामने आया है कि तांत्रिक क्रिया और रहस्यमयी खजाने को निकालने के लिए करीबियों ने ही इस वारदात को अंजाम दिया था.
करीबियों ने ही रची खौफनाक साजिश
पुलिस जांच, मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन, एफएसएल (FSL) टीम और डॉग स्क्वॉड से मिले महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर पुलिस ने हत्या के आरोप में विजय जैन के ही दो करीबियों को गिरफ्तार किया है.
हैरानी की बात यह है कि जिस विजय जैन को इलाके के लोग करोड़ों के लेन-देन के कारण ‘खजांची’ मानते थे, वही इस खौफनाक कहानी का शिकार बन गए.
कैसे हुआ मामले का खुलासा
पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ कर बताया इस हत्याकांड को खजाना पाने के लालच में अंजाम दिया गया. जब विजय जैन का शव मिला तो पुलिस ने कॉल डिटेल की जांच की. जिसके आधार पर 6 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. अंत में पुलिस का शक तीन लोगों पर गहराया तो उनसे और कड़ाई से पूछताछ की गई तो पूरा मामला खुल गया. आरोपियों ने बताया कि उन्हें लगता था कि नदी में खजाना दबा हुआ है और किसी की बलि देंगे तो वो खजाना मिल सकता है.
आरोपियों ने साक्ष्य छुपाने के मकसद के उसी सूखी नदी के किनारे उनके गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया. लेकिन छह दिनों बाद एक चरवाहे ने देखा कि कुत्ते शव के पैर को नोच रहे हैं. इसी के बाद चरवाहे ने पुलिस को मामले की सूचना दी.
पुलिस थ्योरी और खुलासे पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस पूरे हत्याकांड को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और पुलिस का यह खुलासा अब खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है. सामाजिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, तांत्रिक क्रियाओं में किसी भी ऐसे व्यक्ति की बलि नहीं चढ़ाई जाती जो विकलांग हो या जिसके शरीर का कोई अंग कृत्रिम हो. क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मृतक विजय जैन की एक आंख डुप्लीकेट (कृत्रिम) लगी हुई थी. यह बात उनके बेहद करीबी रहे दोनों आरोपियों को भी अच्छी तरह पता थी. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि इस तथ्य की जानकारी होने के बावजूद आरोपियों ने इसे बलि का मामला क्यों बनाया, या फिर हत्या की असली वजह करोड़ों रुपये का लेन-देन और संपत्ति विवाद तो नहीं है जिसे छुपाने के लिए अंधविश्वास और बलि की कहानी गढ़ी गई.
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मामले की विस्तृत जांच में जुटी पुलिस
घटना की गंभीरता को देखते हुए रायसेन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) दीपक नायक के नेतृत्व में पुलिस बल और प्रशासनिक अमला लगातार कार्रवाई कर रहा है. पुलिस अधीक्षक ने भी स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल पुलिस ने शव को पंचनामा कार्रवाई के बाद गैरतगंज सिविल अस्पताल की मर्चुरी में रखवा दिया है, जहां मंगलवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर फिलहाल कार्रवाई की गई है और मौत के सटीक कारणों का पूरी तरह खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तथा मामले की विस्तृत विवेचना के बाद ही हो सकेगा.
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