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India-EU FTA: 4 महीने में लागू होगी ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’, FICCI के आनंद स्वरूप बोले- खत्म करनी होगी लालफीताशाही | Ficci Secretary Highlights Opportunities For Indian Textile Footwear And Jewellery Industries In Upcoming FTA



भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन से एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण भरोसा जताया है कि अगले 4 से 5 महीनों के भीतर यह ऐतिहासिक समझौता पूरी तरह से जमीन पर लागू हो जाएगा. इस समझौते को भारतीय उद्योग जगत ‘सभी समझौतों की जननी’ मान रहा है. 20 सालों की लंबी बातचीत के बाद, पिछले 13 महीनों में इसे जिस तेजी से आखिर रूप दिया गया है, उसने दोनों पक्षों के व्यापारियों में भारी उत्साह भर दिया है. 

इस ऐतिहासिक मोड़ पर फिक्की (FICCI) के महासचिव आनंद स्वरूप ने बर्लिन में एनडीटीवी इंडिया के विशेष संवाददाता हिमांशु शेखर से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि यह समझौता भारत के मध्यम और लघु उद्योगों और खासकर श्रम-प्रधान सेक्टर्स के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है.

2 अरब लोगों का साझा बाजार 

आनंद स्वरूप ने बातचीत के दौरान साफ किया कि यह समझौता दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर ला रहा है. इससे लगभग दो अरब लोगों का एक विशाल और समृद्ध बाजार तैयार होगा. उन्होंने कहा, “यूरोपीय संघ भारत के लिए एक बहुत बड़ा और बेहतर भुगतान करने वाला बाजार है. इस एफटीए के लागू होने से भारत को वह बराबरी का मौका मिलेगा जो अब तक कुछ पड़ोसी देशों के पास था.”

उन्होंने कपड़ा उद्योग की मिसाल देते हुए समझाया कि बांग्लादेश जैसे देशों को एलडीसी (कम विकसित देश) होने के नाते यूरोपीय बाजारों में शून्य-शुल्क का लाभ मिलता था, जबकि भारतीय निर्यातकों को 16-17% तक भारी शुल्क देना पड़ता था. इस एफटीए के लागू होते ही भारत का यह नुकसान पूरी तरह खत्म हो जाएगा और हमारे कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, रत्न-आभूषण तथा समुद्री उत्पादों के निर्यात में भारी उछाल आएगा.

लालफीताशाही को लेकर क्या बोले?

जर्मन व्यापार मंत्री की ओर से भारतीय कारोबारी माहौल में शुल्क कम करने और दोनों देशों में ‘लालफीताशाही’ को कम करने की आवश्यकता पर दिए गए बयान पर भी चर्चा हुई. इस पर फिक्की महासचिव ने साफ कहा कि इस समझौते के तहत टैरिफ को लेकर जो भी लेन-देन होना था, वह बातचीत के दौर में तय हो चुका है और अब हम लागू करने के चरण में हैं. हालांकि, उन्होंने जर्मन मंत्री की बात का समर्थन करते हुए कहा कि लालफीताशाही और व्यापार करने में जटिलता से कारोबार की लागत बढ़ती है. इसलिए भारत और जर्मनी दोनों को अपने प्रशासनिक स्तर पर सुधार करने होंगे. 

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के मानक कई बार बहुत ऊंचे और संरक्षणवादी होते हैं, जिन्हें सरल बनाना होगा ताकि जमीनी स्तर पर व्यापार और निवेश को एक स्थिर माहौल मिल सके.

100 से अधिक भारतीय दिग्गजों का बर्लिन में जमावड़ा

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ इस समय 100 से अधिक भारतीय व्यापारिक नेताओं और स्टार्टअप प्रतिनिधियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल जर्मनी के दौरे पर है. इस प्रतिनिधिमंडल के एजेंडे पर बात करते हुए आनंद स्वरूप ने बताया कि इसमें आईटी, विनिर्माण (Manufacturing), सेवाओं, रसायनों और फुटवियर जैसे बेहद विविध क्षेत्रों के लोग शामिल हैं. भारत के ये उद्यमी और स्टार्टअप्स अभी से अपने जर्मन और यूरोपीय सहयोगियों, ग्राहकों और भागीदारों के साथ तालमेल बिठाने में जुट गए हैं, ताकि जैसे ही यह समझौता लागू हो, भारतीय कंपनियां सबसे पहले इसका पूरा फायदा उठाने के लिए तैयार रहें.

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