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दिवाली के बाद सोनिया गांधी की आ रही किताब, राजनीतिक धमाके के कयास; क्यों टाइमिंग के चर्चे | Sonia Gandhi book to be released after Diwali spark new political debate



कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुस्तक ‘Belongings: Journey of Love’ 10 नवंबर को प्रकाशित होने जा रही है. किताब की घोषणा के साथ एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें उनके जीवन की झलक दिखाई गई है. कांग्रेस और विपक्ष की सक्रिय राजनीति के बीच इस किताब को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बताया जा रहा है कि किताब में सोनिया गांधी ने अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं को शामिल किया है. इसमें इटली से भारत आने, गांधी परिवार का हिस्सा बनने, सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने और लंबे राजनीतिक सफर के अनुभवों का जिक्र किया गया है. किताब में निजी जीवन के साथ-साथ राजनीतिक परिस्थितियों और अपने अनुभवों पर भी उन्होंने विस्तार से लिखा है.

पहली बार सोशल मीडिया पर सक्रिय हुईं सोनिया गांधी

किताब के प्रकाशन से पहले सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और एक्स पर भी एंट्री की है. अपने राजनीतिक जीवन में वह सोशल मीडिया से लगभग दूर रही हैं. ऐसे में उनकी डिजिटल उपस्थिति को एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि बदलते समय में लोगों तक सीधे पहुंचने और अपनी बात रखने के लिए यह कदम उठाया गया है.

गांधी परिवार की डिजिटल रणनीति में नया अध्याय

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पहले से सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं. राहुल गांधी लगातार डिजिटल माध्यमों से युवाओं और समर्थकों से संवाद करते रहे हैं. अब सोनिया गांधी के जुड़ने से गांधी परिवार की डिजिटल मौजूदगी और मजबूत होती दिखाई दे रही है. किताब के प्रचार और उससे जुड़े विचारों को लोगों तक पहुंचाने में भी सोशल मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है.

किताब की टाइमिंग क्यों मानी जा रही है खास?

सोनिया गांधी की किताब ऐसे समय आ रही है जब विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर लगातार मुखर है. संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक टकराव का माहौल बना हुआ है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि किताब में समकालीन राजनीति, पूर्व सरकारों के अनुभवों और मौजूदा हालात को लेकर क्या बातें सामने आती हैं.

क्या किताब बनेगी नया राजनीतिक मुद्दा?

सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक जीवन में निजी अनुभवों पर बहुत कम सार्वजनिक रूप से चर्चा की है. यही वजह है कि इस किताब को लेकर उत्सुकता बढ़ी हुई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों की नजरें भी इस पर टिकी हैं. माना जा रहा है कि किताब में लिखी गई कुछ बातें राजनीतिक बहस को नया विषय दे सकती हैं. दिवाली के कुछ दिन बाद आने वाली यह किताब सिर्फ साहित्यिक नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का केंद्र बन सकती है.

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