
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों और उप-प्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस दौरान उन्होंने सभी निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश को चिट्टा मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प भी दिलाया.
धर्मशाला के दाड़ी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पंचायतों की भूमिका, प्रदेश सरकार की योजनाओं, ग्रामीण विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर विस्तार से बात की.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतें भारतीय लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई हैं और गांवों के विकास में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है. उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करते हैं.
उन्होंने कहा कि गांवों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी योजनाओं को सही तरीके से लागू करवाने की जिम्मेदारी पंचायत प्रतिनिधियों की होती है. साथ ही उन्हें पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी भी सुनिश्चित करनी होती है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों के जरिए पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई. उन्होंने कहा कि इसकी वैचारिक आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी थी.
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव समयबद्ध तरीके से संपन्न करवाए. साथ ही बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है.
आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने की दिशा में काम
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने बताया कि वित्तीय अनुशासन, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और फिजूलखर्ची पर नियंत्रण के जरिए सरकार ने हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है.
उन्होंने कहा कि ग्रीन बोनस, राजस्व घाटा अनुदान, शानन परियोजना और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड जैसे मुद्दों पर हिमाचल के हितों की मजबूती से पैरवी की जा रही है.
किशाऊ बांध परियोजना में मिली बड़ी सफलता
मुख्यमंत्री ने कहा कि 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना में राज्य सरकार को महत्वपूर्ण सफलता मिली है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति दी है कि इस परियोजना के जल घटक से लाभ लेने वाले राज्य हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत वहन करेंगे.
उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल प्रदेश पर वित्तीय बोझ कम होगा. परियोजना पूरी होने के बाद प्रदेश को हर साल करीब 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 600 करोड़ रुपये होगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है. उन्होंने बताया कि गाय के दूध का समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये और भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है.
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कच्ची हल्दी पर 150 रुपये, गेहूं पर 80 रुपये और मक्का पर 50 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है. चंबा जिले की पांगी घाटी को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल बनाया गया है.
इसके अलावा प्राकृतिक जौ की खरीद 80 रुपये प्रति किलो और पहली बार अदरक की खरीद 30 रुपये प्रति किलो के समर्थन मूल्य पर की जा रही है. प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों की ‘हिम’ ब्रांड के तहत ब्रांडिंग भी की जा रही है.
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युवाओं को रोजगार देने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है. उन्होंने बताया कि जल्द ही पुलिस विभाग में 800 कांस्टेबल पदों पर भर्ती की जाएगी.उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मनरेगा मजदूरी 247 रुपये से बढ़ाकर 320 रुपये प्रतिदिन कर दी है. इसके परिणामस्वरूप पिछले वित्त वर्ष में 250 लाख मानव-दिवस के लक्ष्य के मुकाबले 407 लाख मानव-दिवस सृजित किए गए.
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की मूल अवधारणा में बदलाव किए जाने से हिमाचल प्रदेश को हर साल लगभग 800 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है. उन्होंने यह भी कहा कि अग्निवीर भर्ती योजना और मनरेगा में हुए बदलावों के कारण रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं.
चिट्टा के खिलाफ आंदोलन मजबूत करने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़ते नशे, विशेषकर चिट्टा को गंभीर सामाजिक चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि सरकार बहुआयामी रणनीति के तहत नशा माफिया के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.
उन्होंने बताया कि 15 नवंबर 2025 से शुरू किया गया ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ अब पूरे प्रदेश में एक बड़े जन अभियान का रूप ले चुका है. सरकार ने 234 पंचायतों को चिट्टा प्रभावित श्रेणी में चिन्हित किया है, जहां विशेष निगरानी रखी जा रही है.
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से अपनी-अपनी पंचायतों को चिट्टा मुक्त बनाने और युवाओं को खेल, शिक्षा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का आह्वान किया.
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में बड़े सुधार किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू कर दी गई है.
राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल चरणबद्ध तरीके से स्थापित किए जा रहे हैं और चयनित सरकारी विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया गया है. सरकार 5,400 से अधिक शिक्षकों की भर्ती और 150 सीबीएसई स्कूल स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है.
स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण के लिए 213.75 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसके तहत आधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, डिजिटल रेडियोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल मैमोग्राफी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं.
कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन को रोजगार का बड़ा माध्यम बनाने के लिए नई पर्यटन नीति लागू की गई है. कांगड़ा को पर्यटन राजधानी घोषित किए जाने के बाद कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है.
उन्होंने बताया कि इस परियोजना से प्रभावित किसानों को लगभग 2,500 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है. वहीं अन्य प्रभावित परिवारों को भी नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया गया है. इसके अलावा आपदा प्रभावित परिवारों के लिए मकान निर्माण सहायता राशि को डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है.
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आदर्श पंचायतों के निर्माण का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विश्वास जताया कि नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ जनसेवा को प्राथमिकता देंगे. उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि गांवों के विकास और आदर्श पंचायतों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
