

नई दिल्ली:
सोने की कीमतों में तेजी का असर अब निवेश के तरीकों पर भी दिखाई देने लगा है. शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोग भी तेजी से गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) का रुख कर रहे हैं. पिछले 3 सालों में गोल्ड ETF में निवेशकों की दिलचस्पी इतनी बढ़ी है कि इसने लार्ज-कैप इक्विटी फंडों को भी पीछे छोड़ दिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2023 से अब तक गोल्ड ईटीएफ के फोलियो की संख्या 2.6 गुना हो गई है. हालांकि, एक्सपर्ट इस बढ़ते रुझान को लेकर निवेशकों को सावधान भी कर रहे हैं.
ओम्नीसाइंस कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2023 से अब तक गोल्ड ईटीएफ के फोलियो में 2.6 गुना बढ़ोतरी हुई है. वहीं, इस दौरान लार्ज-कैप इक्विटी फंडों के फोलियो की संख्या केवल 1.3 गुना बढ़ी है. इससे पता चलता है कि निवेशकों का झुकाव शेयर बाजार के बड़े फंडों की तुलना में सोने की तरफ तेजी से बढ़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह लार्ज-कैप इक्विटी फंडों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के एयूएम का करीब 47 फीसदी है.
कहीं आप भी ‘FOMO’ के शिकार तो नहीं?
ओम्नीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर अश्विनी शामी के मुताबिक, निवेशकों का गोल्ड ETF की तरफ तेजी से बढ़ना फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) यानी अच्छा रिटर्न पाने का मौका छूट जाने का डर दिखाता है. सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखकर निवेशक इसमें पैसा लगा रहे हैं. उनका मानना है कि निवेशकों का इस तरह किसी एक एसेट की तरफ झुकाव संतुलित निवेश रणनीति के लिहाज से ठीक नहीं है.
पोर्टफोलियो में कितना होना चाहिए सोना?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेश पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी आमतौर पर 5 से 10 फीसदी तक रखना बेहतर माना जाता है. वहीं, प्राइवेट इक्विटी, रियल एस्टेट और दूसरे वैकल्पिक निवेश साधनों को मिलाकर इनकी कुल हिस्सेदारी 10 से 20 फीसदी के बीच हो सकती है. अश्विनी शामी ने निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने और सोने से भविष्य में मिलने वाले रिटर्न को लेकर जरूरत से ज्यादा उम्मीद नहीं रखने की सलाह दी है.
क्या आगे भी चमकता रहेगा सोना?
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी इसकी कीमतों को सहारा दे रही है. हालांकि, सिर्फ केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के दम पर सोने की कीमतों में लगातार तेजी बने रहना जरूरी नहीं है. अगर निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए फिक्स्ड इनकम और डेट जैसे ऑप्शंस की तरफ बढ़ते हैं तो सोने की मांग इफेक्टेड हो सकती है. इसलिए एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सिर्फ हालिया तेजी देखकर गोल्ड ईटीएफ में जरूरत से ज्यादा निवेश करने से बचें.
क्या होता है गोल्ड ईटीएफ
बता दें कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ एक ऐसा निवेश ऑप्शन है, जिसमें आप बिना फिजिकल सोना खरीदे, सोने में निवेश कर सकते हैं. यह शेयर बाजार में लिस्टेड फंड होता है, जिसे आप शेयर की तरह खरीद- बेच सकते हैं. इसमें आपका पैसा सीधे सोने की कीमत से जुड़ा होता है. अगर सोने का भाव बढ़ता है तो आपके निवेश की वैल्यू भी बढ़ती है और गिरने पर कम हो जाती है.
गोल्ड ईटीफ के फायदे
- शुद्धता की 100% गारंटी
- सुरक्षा की चिंता नहीं
- ‘मेकिंग चार्ज’ से आजादी
- छोटी राशि से शुरुआत
- आसानी से बेचना
- पूरे देश में एक समान कीमत





