
भारत चुनाव आयोग की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के बाद से चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के एक संगठन की तरह काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि SIR की प्रक्रिया ने इस धारणा को और मजबूत किया है.
दिग्विजय सिंह ने कहा, मैं यह कहना चाहता हूं कि जब से ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है, तब से चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के एक संगठन की तरह काम कर रहा है. स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) जिस तरह से किया गया है, उससे यह बात और भी साफ हो गई है.
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीन आयुक्तों की भूमिका का जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने SIR की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी. दिग्विजय सिंह के मुताबिक, इन आपत्तियों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्वीकार नहीं किया.
‘सूची कहां से आती है, यह बताने की जरूरत नहीं’
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के तहत पहले से ही एक सूची तैयार रहती है, जिसमें यह बताया जाता है कि किन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने हैं और किनके नाम जोड़े जाने हैं. दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह सूची कहां से आती है, यह बताने की जरूरत नहीं है.
कांग्रेस नेता ने कहा, आरोप है कि SIR इस तरह से किया जा रहा है कि पहले ही ज्ञानेश कुमार को कंप्यूटर पर एक लिस्ट दी जाती है, जिसमें बताया जाता है कि वोटर लिस्ट से किनके नाम हटाने हैं और किनके नाम जोड़ने हैं. मुझे आपको यह बताने की जरूरत नहीं है कि ऐसी लिस्ट कहां से आती है. फिर उसी आधार पर SIR किया जाता है.
आरोपों पर क्या बोला ECI?
उधर, दिग्विजय सिंह के आरोप ऐसे समय सामने आए हैं जब चुनाव आयोग ने एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित उस रिपोर्ट को खारिज किया है, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी.
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रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ये आपत्तियां अलग-अलग फैसलों और प्रक्रियाओं से जुड़ी थीं. इनमें कुछ मामलों में चुनाव आयुक्तों को फैसलों की जानकारी नहीं दिए जाने और नए मतदाताओं को जोड़ने या मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे मुद्दे शामिल होने की बात कही गई थी.