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मेरठ कचहरी में BJP सांसद- विधायकों की एंट्री बैन, हाईकोर्ट बेंच की मांग पर वकीलों का बड़ा ऐलान | Lawyers Intensify Demand for High Court Bench in Western UP Announce Ban on BJP Representatives in Meerut Court



पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलन अब और तेज होता दिख रहा है. मेरठ बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति ने कई बड़े फैसले लेते हुए भाजपा जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. वकीलों ने मेरठ कचहरी में BJP सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की एंट्री पर बैन लगाने का ऐलान किया है. इसके साथ ही MP-MLA कोर्ट में भाजपा जनप्रतिनिधियों के मामलों की पैरवी नहीं करने और पहले से दाखिल वकालतनामे वापस लेने का निर्णय भी लिया गया है.

सीएम योगी से मुलाकात के बाद बढ़ी नाराजगी

दरअसल, 21 सितंबर को हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला था. वकीलों का कहना है कि वे इस मुलाकात से बड़ी उम्मीदें लेकर गए थे, लेकिन उन्हें पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला.

वकीलों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि हाईकोर्ट बेंच का मामला सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ विषय है. इस जवाब से वकीलों में नाराजगी बढ़ गई.

आम सभा में हुए बड़े फैसले

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मेरठ बार एसोसिएशन की आम सभा बुलाई गई, जिसमें आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया गया. कचहरी परिसर के मुख्य गेटों पर ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ और ‘भाजपा जनप्रतिनिधियों का प्रवेश निषेध’ जैसे बैनर लगाए गए हैं. वकीलों का कहना है कि जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की दिशा में ठोस पहल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा.

22 जिलों में न्यायिक कार्य से विरत रहे वकील

आंदोलन के समर्थन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के वकीलों ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला लिया. इस दौरान कई स्थानों पर प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किए गए. वकीलों का कहना है कि पश्चिमी यूपी के लोगों को इंसाफ के लिए इलाहाबाद तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और पैसा दोनों का नुकसान होता है. इसलिए मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करना उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग है.

हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन अनुज शर्मा और संयोजक परवेज आलम ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को न्याय तक आसान पहुंच दिलाने के लिए है.

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