धर्म

Bada Mangal: व्रत रखा है तो जान लें इसे समाप्त करने का सही नियम, उद्यापन के बिना नहीं माना जाता पूर्ण


Bada Mangal: ज्येष्ठ माह में आने वाले बड़े मंगल का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत भी रखते हैं.

कई श्रद्धालु 11, 21 या उससे अधिक मंगलवारों का संकल्प लेकर व्रत करते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि व्रत को सही तरीके से समाप्त करने के लिए उसका उद्यापन करना भी आवश्यक माना गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब व्रत का संकल्प पूरा हो जाए, तब अंतिम मंगलवार को विधि-विधान से पूजा कर उद्यापन करना चाहिए. ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और हनुमान जी की विशेष कृपा बनी रहती है.

व्रत पूरा होने पर करें उद्यापन

यदि आपने 11, 21 या किसी निश्चित संख्या में बड़े मंगल के व्रत रखने का संकल्प लिया था और वह पूरा हो गया है, तो अंतिम मंगलवार को उद्यापन अवश्य करें. उद्यापन को व्रत की पूर्णाहुति माना जाता है. इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है.

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इस तरह करें बड़ा मंगल उद्यापन की पूजा

उद्यापन वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.

पूजा के दौरान हनुमान जी को सिंदूर, चंदन और अक्षत अर्पित करें. पीले या लाल फूलों की माला चढ़ाएं और दीपक जलाकर आरती करें. इसके बाद चमेली का तेल और सिंदूर अर्पित करना शुभ माना जाता है.

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इन चीजों का लगाएं भोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, चूरमा, गुड़ और चना अत्यंत प्रिय हैं. उद्यापन के दिन बजरंगबली को सवा किलो (1.25 किलोग्राम) चूरमा, बूंदी या बेसन के लड्डुओं का भोग लगाना शुभ माना जाता है.

कहा जाता है कि इन चीजों का भोग लगाने से साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति मिलती है. साथ ही सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है.

करें हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ

पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें. यदि संभव हो तो सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ भी किया जा सकता है. मान्यता है कि इनका पाठ करने से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा मन को शांति प्राप्त होती है.

दान-पुण्य का विशेष महत्व

बड़ा मंगल के उद्यापन में दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है. अपनी सामर्थ्य के अनुसार 5, 7 या 11 ब्राह्मणों अथवा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं. उन्हें दक्षिणा और लाल रंग का वस्त्र दान देना भी शुभ माना जाता है.

यदि घर पर भोजन कराना संभव न हो तो किसी मंदिर में प्रसाद वितरण कर सकते हैं या भंडारे का आयोजन कर सकते हैं. इसके अलावा शरबत, जल, पूड़ी-सब्जी, हलवा आदि का दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है.

बंदरों को जरूर खिलाएं ये चीजें

हनुमान जी की पूजा में बंदरों का विशेष महत्व माना गया है. इसलिए उद्यापन के दिन बंदरों को चना, गुड़ या केले खिलाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं.

इन बातों का भी रखें ध्यान

घर और मंदिर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.

पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करें.

व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें.

सात्विक जीवनशैली अपनाएं और क्रोध से बचें.

जरूरतमंद लोगों की सहायता करें.

इस तरह करें व्रत का पारण

बड़ा मंगल व्रत का पारण शाम की पूजा, दान और प्रसाद वितरण के बाद किया जाता है. व्रत खोलते समय सात्विक भोजन ग्रहण करें. लहसुन-प्याज से बने भोजन से बचें. कई श्रद्धालु इस दिन नमक का सेवन भी नहीं करते और हनुमान जी को अर्पित प्रसाद ग्रहण करके व्रत का समापन करते हैं.

क्या उद्यापन के बाद भी रख सकते हैं व्रत?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उद्यापन के बाद व्रत का संकल्प पूरा माना जाता है. हालांकि यदि कोई श्रद्धालु अपनी भक्ति और श्रद्धा के कारण आगे भी बड़े मंगल का व्रत रखना चाहे तो वह रख सकता है. इसके लिए नया संकल्प लेना उचित माना जाता है.



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