
नई दिल्ली:
दुनियाभर में न सिर्फ बेरोजगारों की आबादी बढ़ रही है, बल्कि ऐसे युवा भी बढ़ रहे हैं, जो खाली बैठे रहते हैं. ये बात संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में 15 से 24 साल के 12 फीसदी से ज्यादा युवा बेरोजगार घूम रहे हैं. रिपोर्ट यह भी बताते है कि खाली बैठे रहने वाले युवाओं की आबादी भी 20 फीसदी से ज्यादा हो गई है. ये ऐसे युवा हैं जो न तो कहीं काम कर रहे हैं, न काम ढूंढ रहे हैं और न ही कोई पढ़ाई-लिखाई कर रहे हैं.
‘द ग्लोबल एम्प्लॉयमेंट ट्रेंड्स फॉर यूथ 2026: बैक टू द फ्यूचर’ नाम की ये रिपोर्ट 11 अगस्त को रिलीज हुई है. इसमें दावा किया गया है कि युवाओं की बेरोजगारी दर 2023 में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी लेकिन अब फिर से बढ़ने लगी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में 15 से 24 साल के युवाओं की बेरोजगारी दर 12.3% थी, जो 21वीं सदी में सबसे निचला स्तर था. लेकिन 2025 में ये बढ़कर 12.4% हो गई. प्रतिशत में देखा जाए तो यह सिर्फ 0.01% होता है लेकिन संख्या में देखें तो ये 20 लाख से भी ज्यादा होती है. ILO की रिपोर्ट बताती है कि 2025 तक दुनियाभर में 15 से 24 साल के 6.7 करोड़ युवा बेरोजगार थे. 2023 तक इनकी संख्या 6.5 करोड़ के आसपास थी.
कैसे बढ़ रही है बेरोजगारी?
ILO की रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में लगभग सभी जगह बेरोजगारी बढ़ रही है. 15 से 24 साल की महिलाओं में बेरोजगारी दर 12.1% और पुरुषों में 12.6% है.
रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल युवा आबादी बढ़ रही है. 2023 से 2025 के बीच 2.5 करोड़ युवा बढ़े हैं. इनमें से 60% सब-सहारा अफ्रीका रीजन में बढ़े हैं. ज्यादातर काम ढूंढने निकले लेकिन सबको नौकरी नहीं मिले. दो साल में 18 लाख से ज्यादा बेरोजगार बढ़े हैं. इसलिए 2023 की तुलना में 2025 में युवाओं में बेरोजगारी दर 12.3% से बढ़कर 12.4% हो गई.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि 105 देशों में युवाओं में बेरोजगारी दर बढ़ी है, जबकि 58 देश ऐसे हैं जहां इसमें गिरावट देखी गई है.
यह रिपोर्ट कहती है कि युवाओं में बेरोजगारी का खतरा 25 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की तुलना में 3 गुना ज्यादा है. 25 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर 3.7% से कम होकर 3.6% हो गई. दूसरी तरफ 15 से 24 साल के उम्र के युवाओं में बेरोजगारी दर बढ़ी है.
2025 में एक युवा के बेरोजगार होने का खतरा 25 साल से ज्यादा उम्र के एक वयस्क की तुलना में 3.43 गुना ज्यादा है. पहले यह 3.35 गुना था. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यह रेशो 4 के पास पहुंच जाता है तो समझ लीजिए कि ग्लोबल इकनॉमी में नए युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है.
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फ्रेशर्स पर मंडरा रहा बड़ा खतरा?
दुनियाभर में फ्रेशर्स को नौकरी नहीं मिल नहीं रही है. सिर्फ गरीब या छोटे देश ही नहीं, बल्कि अमीर देशों में भी बेरोजगारी बढ़ रही है. ऑस्ट्रिया, कनाडा, चिली, डेनमार्क, हॉन्गकॉन्ग, पनामा, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, स्वीडन, थाईलैंड, यूके और अमेरिका जैसे देशों में भी फ्रेशर्स को नौकरी नहीं मिल पा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर देशों में 20-24 साल के युवाओं और 25-54 साल के अनुभवी लोगों की बेरोजगारी के बीच का गैप बढ़ गया है. इसका मतलब है कि अब कंपनियां फ्रेशर्स को नौकरी पर रखने से कतरा रही हैं.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि 20 से 29 साल के बेरोजगारों में ‘पहली बार नौकरी ढूंढने वालों’ का हिस्सा 43.4% से बढ़कर 45.1% हो गया है. साउथ एशिया में सबसे बुरा हाल है, जहां ये आंकड़ा बढ़कर 64.8% से बढ़कर 80% हो गया. इसका मतलब हुआ कि साउथ एशिया में हर 10 बेरोजगार युवाओं में से 8 युवा पहली बार नौकरी ढूंढ रहे हैं और उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है.

नौकरियों क्यों नहीं मिल रही?
इसकी एक वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी है. अब कई नौकरियों को AI रिप्लेस कर रहा है. ILO की रिपोर्ट में पाया गया है कि बदलती टेक्नोलॉजी, खासकर AI युवाओं के लिए मौकों को बदल रहा है.
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 15 से 29 साल के युवाओं के लिए जो नौकरियां हैं, उनमें से 6.1% नौकरियां ऐसे कामों से जुड़ी हैं जिन पर AI का बहुत ज्यादा असर पड़ सकता है. इसका सबसे ज्यादा असर मिडिल-स्किल वाले युवाओं पर पड़ रहा है और उनके लिए मौके कम हो रहे हैं.
रिपोर्ट कहती है कि एक तरफ क्लर्क और एडमिनिस्ट्रेटिव जैसे कामों पर टेक्नोलॉजी असर डाल रही है तो दूसरी तरफ साइंस, हेल्थ और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भी तकनीकी कामों की मांग बढ़ रही है. इससे यह बात अहम हो जाती है कि युवाओं को ऐसी स्किल सीखने की जरूरत है जो बदलते लेबर मार्केट की जरूरतों के हिसाब से हों.
ILO से जुड़ीं सुक्ति दासगुप्ता ने कहा, ‘नौकरियों पर AI के सीधे असर के बारे में अभी साफ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन हमें लापरवाह नहीं होना चाहिए और इसके खतरों को कम नहीं आंकना चाहिए. हमें स्किल और सामाजिक सुरक्षा में निवेश बढ़ाना होगा, ताकि युवा बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल सकें और नए मौकों का फायदा उठा सकें.’
उनका कहना है कि AI और टेक्नोलॉजी युवाओं के फायदे के लिए होनी चाहिए, न कि उनके नुकसान के लिए.
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खाली बैठने वाले युवा भी बढ़े?
बेरोजगारी से भी ज्यादा डराने वाले एक आंकड़ा यह है कि खाली बैठने वाले युवाओं की आबादी तेजी से बढ़ रही है. ये वो युवा हैं जो न तो नौकरी कर रहे हैं, न पढ़-लिख रहे हैं और न ही कोई ट्रेनिंग ले रहे हैं या स्किल सीख रहे हैं.
ILO की रिपोर्ट बताती है कि 2023 से 2025 के बीच ऐसे युवाओं की संख्या 90 लाख से ज्यादा बढ़ी है. दुनियाभर में 25.7 करोड़ युवा ऐसे हैं जो कुछ नहीं कर रहे हैं, सिर्फ खाली बैठे हैं. अगर प्रतिशत में देखा जाए तो 15 से 24 साल के 20% युवा इसी कैटेगरी में आते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, खाली बैठने वाले हर तीन में से दो युवा महिलाएं हैं. 15 से 24 साल की महिलाओं में से 27.4% महिलाएं ऐसी ही हैं, जबकि इसी उम्र के 13.1% पुरुष ऐसे हैं जो कुछ नहीं कर रहे. महिलाओं की इतनी संख्या इसलिए है, क्योंकि घर वाले एक उम्र के बाद न तो उन्हें पढ़ने-लिखने भेज रहे हैं और न ही नौकरी करने दे रहे हैं.
रिपोर्ट बताती है कि छोटे और गरीब देशों में ऐसे युवाओं की आबादी तेजी से बढ़ रही है. 2027 तक दुनियाभर में 20.2% युवा ऐसे होंगे जो कुछ नहीं कर रहे होंगे. तब तक कुछ नहीं करने वाले युवाओं की आबादी बढ़कर 26.4 करोड़ होने का अनुमान है. मतलब, अमीर देशों में हालात तब भी ठीक हैं लेकिन गरीब देशों में युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं और न ही नौकरी कर रहे हैं.
अगर बेरोजगार और कुछ नहीं करने वाले युवाओं की संख्या को जोड़ दिया जाए तो 32 करोड़ से ज्यादा युवाओं का भविष्य अंधकार में है.
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