मध्य प्रदेश

16वें दिन खत्म हुआ केन-बेतवा प्रोजेक्ट विरोधी आंदोलन, पुलिस ने अस्पताल भेजे प्रदर्शनकारी


मध्य प्रदेश पुलिस ने केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट और अन्य सिंचाई योजनाओं के खिलाफ प्रदर्शनकारियों को हटाकर शुरू किए गए सत्याग्रह को खत्म करा दिया गया है. यह आंदोलनकारी पिछले कई दिनों से बराना नदी में जल सत्याग्रह कर रहे थे.

मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में जारी अनिश्चितकालीन अनशन रविवार (19 जुलाई) को 16वें दिन में प्रवेश करते ही खत्म करवाया गया.

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एएसपी ने प्रदर्शन को लेकर क्या कहा?

इस बीच छतरपुर के एएसपी आदित्य पटले ने जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि काफी दिन से प्रदर्शनकारी अपना प्रोटेस्ट कर रहे थे. पुलिस और प्रशासन के साथ डॉक्टर्स की टीम यहां पर आई थी. ताकि उनका बेसिक मेडिकल चेकअप कराया जा सके. यह लोग इसके लिए खुद भी इच्छुक थे.

उन्होंने बताया कि उनके द्वारा संपर्क कर लिया गया था कि उनकी तबीयत बिगड़ रही है. इसलिए यहां पर पुलिस फोर्स, डॉक्टर्स और प्रशासन की टीम यहां पर आई थी और शांतिपूर्वक अस्पताल के रवाना किया गया है. 

वहीं उन्होंने आगे बताया कि जो महिलाएं हैं उन्हें शांतिपूर्व बसों में बैठाकर उनके घरों तक छोड़ा जा रहा है. क्योंकि यहां पर निर्माणाधीन पुल है और बारिश होने की वजह से नदी का पानी भी बढ़ रहा है इसलिए उन्हें यहां से हटा दिया गया है. 

प्रदर्शनकारियों ने लगाया था ये आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से संबंधी सरकार और प्रशासन के वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं. मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं की भागीदारी वाला यह आंदोलन छतरपुर जिले के कूपी गांव के पास बराना नदी के तट पर चल रहा था.

प्रदर्शनकारी ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और आंदोलन के आठवें दिन से प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ भी कर रहे थे. आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे थे, जो पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर थे. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान भटनागर का केवल एक बार औपचारिक चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया.

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित की जा रही देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में स्थानांतरित कर मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है.

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