
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले का बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल और मंत्री विश्वास सारंग ने स्वागत किया है. दोनों नेताओं का कहना है कि यह फैसला बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के उद्देश्य से लिया गया है.
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि बोर्ड का पुनर्गठन एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम है. उन्होंने कहा कि इस बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों के साथ दो महिलाओं को भी शामिल किया गया है. उनका कहना है कि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों का क्या काम है और मंदिरों या गुरुद्वारा समितियों में मुस्लिम सदस्यों की बात कर रहे हैं.
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‘वक्फ बोर्ड और मस्जिद अलग-अलग’
इस पर उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड और मस्जिद अलग-अलग संस्थाएं हैं. वक्फ बोर्ड एक प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़ा निकाय है, जहां ईमानदार और सक्षम लोगों की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि बोर्ड का पुनर्गठन इसलिए किया गया है ताकि वक्फ संपत्तियों में किसी तरह का भ्रष्टाचार न हो और जमीनों पर अवैध कब्जों को रोका जा सके.
मंत्री विश्वास सारंग ने बताया सराहनीय फैसला
वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने भी वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को सराहनीय कदम बताया. उन्होंने कहा कि पहली बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है, जो बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. मंत्री सारंग ने कहा कि जो लोग मंदिर या गुरुद्वारा समितियों में मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने जैसी तुलना कर रहे हैं, वे दोनों व्यवस्थाओं के अंतर को नहीं समझ रहे हैं. उनके अनुसार वक्फ बोर्ड कोई मस्जिद नहीं, बल्कि एक वैधानिक बोर्ड है, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का प्रभावी और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है.
कमेटी में हिंदू सदस्य बनाने पर छिड़ा विवाद
दरअसल, नया कानून बनने के बाद बनी वक्फ की नई कमेटी में गैर मुसलमानों को सदस्य बनाने को लेकर अब विवाद छिड़ गया है. ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इसे लेकर बुधवारा चौराहे पर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. मुस्लिम संगठनों की मांग है कि इस कमेटी को तुरंत भंग किया जाए क्योंकि वक्फ बोर्ड उनकी आस्था से जुड़ा हुआ मामला है और इसमें हिंदुओं की एंट्री गलत है.
‘बोर्ड पर कब्जा कर रही सरकार’
मुस्लिम संगठनों का कहना है कि आज सरकार बोर्ड पर कब्जा करने की कोशिश हो रही है , कल मस्जिदों पर और मदरसों पर भी कब्जे होने लगेंगे. मुस्लिम संगठनों के अनुसार सरकार को सिर्फ प्रॉपर्टी नजर आ रही है और लालच की वजह से वह इस पर कब्जा करना चाहते हैं . यह कोई सरकारी संस्था नहीं बल्कि ऑटोनॉमस बॉडी है.
‘जरूरत पड़ी तो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट’
मुस्लिम संगठनों की यह मांग है कि अगर वक्फ बोर्ड में हिंदू शामिल हो रहे हैं तो अयोध्या, मथुरा, महाकाल इन सारे मंदिरों के कमेटी में मुसलमानों को भी शामिल किया जाए. मुस्लिम संगठनों का कहना है कि वह इसके खिलाफ राष्ट्रपति के पास जाएंगे और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे . इसके अलावा मुस्लिम संगठनों की अपील है कि मुसलमान सड़कों पर उतरकर भी इसका विरोध करें.
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