
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के खेड़ा कलालिया गांव की रहने वाली एक महिला रईसा बाई को पिछले 5 माह पहले सरकारी सिस्टम ने कागजों में मृत साबित कर दिया. अब हाल यह है कि पति और पत्नी दोनों ही जिले पर के सरकारी अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. पांच माह से अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है.
महिला रईसा बाई के पति का कहना है कि ग्राम सचिव ने एक बड़ी लापरवाही की है. महिला के पति का कहना है कि 5 महीने से वह अपनी पत्नी को साथ लेकर सिस्टम से पत्नी को जिंदा साबित करने की गुहार लगा रहा है. उसने जिला कलेक्टर, तहसील के एसडीएम, जनपद के सीईओ और जनप्रतिनिधियों में क्षेत्र के विधायक से भी गुहार लगा चुके हैं. महिला के पति ने लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
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कागजों में मृत दिखाने की वजह से नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ
वहीं, पीड़ित रईसा बाई का कहना है कि मुझे 5 माह पहले से कागजों में मृत साबित कर दिया गया. मैं अपने पति के साथ 5 माह से लगातार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही हूं… अब तक मुझे किसी ने कागजों में जिंदा साबित नहीं किया. सरकार से मिलने वाली योजनाओं का लाभ कागजों में मृत होने के बाद मुझे मिलना बंद हो गया हैं. महिला ने बताया कि लाड़ली बहना योजना का पैसा मुझे नहीं मिल रहा औ न गैस सिलेंडर की सब्सिडी मिल रही है.
लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
अब मैं मुख्यमंत्री मोहन यादव से गुहार लगाती हूं कि मुझे कागजों में जिंदा घोषित किया जाए. साथ ही मुझे कागजों में मृत घोषित करने वाले सभी अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए. महिला ने कहा कि वह 5 महीने से परेशान हैं, ऐसे सरकारी सिस्टम पर मुख्यमंत्री को संज्ञान लेकर कार्रवाई करना चाहिए.
ग्राम सचिव का कटा 5 दिन का वेतन
जनपद पंचायत पिपलोदा के सीईओ B.S.HANS ने बताया कि त्रुटि के कारण यह हुआ था, इस मामले में ग्राम सचिव पर कार्रवाई की गई है. सीईओ ने बताया कि लापरवाही बरतने पर ग्राम सचिव का 5 दिन का वेतन काटा गया है, साथ ही महिला रईसा बाई का नाम कागजों में जोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.