मध्य प्रदेश

आयुष्मान भारत और HIMCARE से 21 आयुर्वेदिक अस्पताल बाहर, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए आदेश


हिमाचल प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. प्रदेश के 21 आयुर्वेदिक अस्पतालों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) और मुख्यमंत्री हिमाचल हेल्थ केयर योजना (HIMCARE) से डी-एम्पैनल कर दिया गया है. यह आदेश एचपी स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी (HPSBYS) द्वारा जारी किया गया है.

स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय आदेश के अनुसार, इन आयुर्वेदिक अस्पतालों को Hospital Engagement Module 2.0 में माइग्रेट करने की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें योजनाओं से हटाया गया है. आदेश 23 जून 2026 से तत्काल प्रभावी माना जाएगा. डी-एम्पैनल किए गए अस्पतालों में बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, मंडी, कुल्लू, सोलन, चंबा, धर्मशाला, नाहन, केलांग, रिकांगपिओ, रामपुर बुशहर, कांगड़ा, नालागढ़, हडसर, जोगिंदर नगर, कटराईं, कंडरौर सहित कई जिला एवं क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अस्पताल शामिल हैं. राजीव गांधी राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल पपरोला तथा क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अस्पताल छोटा शिमला भी इस सूची में हैं.

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कैशलेस सुविधा प्रभावित होने की आशंका

इस फैसले के बाद इन अस्पतालों में आयुष्मान भारत और HIMCARE योजनाओं के तहत उपलब्ध कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित उपायुक्तों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, आयुष विभाग और सभी अस्पतालों को आदेश की सूचना भेज दी है. HIMCARE पोर्टल पर इन अस्पतालों के लॉगिन क्रेडेंशियल्स भी निष्क्रिय कर दिए गए हैं. सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी.

भाजपा ने फैसले की आलोचना की

भाजपा ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा एतराज जताया है. भाजपा नेता सुधीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर अधिसूचना साझा करते हुए सरकार की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने का दावा करने वाली सरकार अब आयुर्वेदिक अस्पतालों को योजनाओं से बाहर कर रही है, जो जनहित के विरुद्ध है.

आयुर्वेदिक संस्थानों और लाभार्थियों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है. लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि आयुर्वेदिक चिकित्सा को मजबूत करने की बजाय उसे कमजोर करने वाले फैसले वापस लिए जाएं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह तकनीकी वजह से लिया गया निर्णय है, लेकिन विपक्ष इसे आयुर्वेद के प्रति उपेक्षा बता रहा है.

अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या इन अस्पतालों को फिर से योजनाओं से जोड़ा जाएगा या नई व्यवस्था की जाएगी. यह फैसला हिमाचल में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू कर गया है.

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