
Jagannath Puri 2026: जब भी भगवान जगन्नाथ के पवित्र धाम पुरी का नाम लिया जाता है, मन में भव्य रथयात्रा, आस्था और हजारों वर्षों पुरानी परंपराओं की छवि उभर आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस प्राचीन भारतीय मंदिर में एक ऐसी घंटी भी लगी है, जिसका संबंध हजारों किलोमीटर दूर यूरोप के फ्रांस से है?
जगन्नाथ मंदिर में स्थापित “फ्रेंच घंटी” आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई है. इसकी कहानी केवल एक घंटी की नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के बीच हुए ऐतिहासिक संपर्कों की भी गवाही देती है.
समुद्र के तूफान से जगन्नाथ धाम तक पहुंची फ्रांस की घंटी
18वीं शताब्दी में फ्रांस का एक विशाल जहाज, जिसकी कमान कैप्टन अलबेक बिटो(Captain Albeck Bitto) के हाथों में थी, भारत के पुडुचेरी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था. जहाज पर कई मूल्यवान सामान के साथ एक बड़ी घंटी भी रखी हुई थी, जिसे मूल रूप से एक चर्च में स्थापित किया जाना था.
यात्रा के दौरान अचानक समुद्र का मौसम बिगड़ गया, देखते ही देखते जहाज एक भीषण तूफान की चपेट में आ गया. ऊंची-ऊंची लहरें जहाज को इधर-उधर पटक रही थीं और ऐसा लग रहा था मानो किसी भी पल जहाज समुद्र में समा जाएगा. जहाज पर मौजूद यात्री और नाविक भयभीत हो उठे.
उसी जहाज पर एक उड़िया नाविक भी सवार था, जो भगवान जगन्नाथ का बहुत बड़ा भक्त था. जब उसने कप्तान और अन्य लोगों को निराश देखा, तो उसने भगवान जगन्नाथ की महिमा बताई किया. उसने कप्तान से कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभु जगन्नाथ से प्रार्थना करें, क्योंकि वे अपने भक्तों की रक्षा करने वाले भगवान माने जाते हैं.
यह भी पढ़े- Ramayan: आखिर कौन-सी शक्ति थी जिसने सीता को दुनिया की सबसे अडिग नारी बना दिया?
कहा जाता है कि उस नाविक की बात सुनकर कैप्टन अलबेक बिटो ने पूरे विश्वास के साथ भगवान जगन्नाथ को याद किया. उन्होंने मन ही मन एक संकल्प लिया कि यदि उनका जहाज इस भयंकर तूफान से सुरक्षित निकल गया, तो जहाज पर मौजूद बड़ी घंटी को भगवान जगन्नाथ के चरणों में समर्पित कर देंगे.
लोककथाओं के अनुसार, प्रार्थना के कुछ समय बाद समुद्र का प्रकोप धीरे-धीरे शांत होने लगा. जहाज सुरक्षित रूप से अपने मार्ग पर आगे बढ़ गया और एक बड़ी दुर्घटना टल गई. इस चमत्कारिक अनुभव से प्रभावित कप्तान ने अपनी मन्नत पूरी करने का निर्णय लिया.
बाद में वह घंटी भगवान जगन्नाथ को भेंट कर दी गई और जगन्नाथ पुरी मंदिर परिसर में स्थापित की गई. यही घंटी आज “फ्रेंच घंटी” के नाम से प्रसिद्ध है. माना जाता है कि यह केवल धातु से बनी एक वस्तु नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और भगवान के प्रति समर्पण की एक अनोखी कहानी की प्रतीक है.
आज भी जब श्रद्धालु इस घंटी के बारे में सुनते हैं, तो उन्हें यह एहसास होता है कि भगवान जगन्नाथ की महिमा केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि समुद्र पार से आए लोगों के हृदय को भी प्रभावित करती रही है. फ्रांस से जुड़ी यह घंटी जगन्नाथ धाम की सबसे रोचक ऐतिहासिक धरोहरों में गिनी जाती है.
यह भी पढ़े- Ramayan: एक फैसला जिसने अयोध्या के भावी राजा को राजमहल छोड़ तपस्वी बना दिया
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


