

पटना:
बिहार की 8 MLC सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को कोई सफलता नहीं मिली. पार्टी ने एक जीती हुई सीट गंवा दी. दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मदन मोहन झा जनसुराज के उम्मीदवार एसपी राय से चुनाव हार गए. चुनाव हारने के बावजूद मदन मोहन झा इकलौते उम्मीदवार रहे, जिन्होंने जीतने वाले उम्मीदवार को टक्कर दी. उनके अलावा कोई भी उम्मीदवार रेस में नहीं था. पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार महज 21 वोट हासिल कर पाए. यहां कांग्रेस प्रत्याशी को 1% वोट भी नहीं मिला. पार्टी ने 5 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे थे.
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
इस सीट से पार्टी ने सेवा दल के अध्यक्ष संजय यादव को उम्मीदवार बनाया था. सीट पर 8 हजार 758 वोट पड़े, इनमें 8 हजार 490 वोट वैध पाए गए. जीतने वाले उम्मीदवार को 4487 वोट मिले. कांग्रेस के प्रत्याशी को महज 21 वोट मिले. पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार असादुल्लाह खान को 971 वोट मिले और वह चौथे नंबर पर रहे.
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने मनोज जायसवाल को उम्मीदवार बनाया था। इस सीट पर 73487 वोट पड़े इनमें 64401 वोट वैध पाए गए. जीतने वाले प्रत्याशी को 31823 वोट मिले. कांग्रेस के प्रत्याशी को सिर्फ 2297 वोट मिले महज 3 प्रतिशत.
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने मदन मोहन झा को उम्मीदवार बनाया था. वे मौजूदा MLC थे। यहां 7495 मत पड़े, इनमें 7753 मत वैध पाए गए. इनमें जीतने वाले प्रत्याशी को 4088 वोट मिले और मदन मोहन झा को 2977 वोट मिले.
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
प्रथम वरीयता के मतों की गिनती के बाद इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार सर्वेश कुमार 13280 वोट के साथ पहले स्थान पर हैं। राजद के उम्मीदवार अनिल झा 12096 मतों के साथ दूसरे स्थान पर हैं. जन सुराज के उम्मीदवार मोहम्मद इम्तियाज 8044 वोट के साथ तीसरे, निर्दलीय प्रत्याशी छात्र नेता दिलीप 4912 वोट के साथ चौथे स्थान पर हैं और कांग्रेस के उम्मीदवार रजनीकांत पाठक 3496 वोट के साथ पांचवें स्थान पर हैं.
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर भी पार्टी के उम्मीदवार असदुल्लाह खान छाप छोड़ने में नाकाम रहे हैं. हालांकि कांग्रेस के नेता अब भी सिर्फ आयोग को ही अपनी हार का जिम्मेदार मानते हैं. कांग्रेस के मीडिया विभाग के कॉर्डिनेटर असित नाथ तिवारी कहते हैं कि चुनाव में हम एक बहुत बड़े गठबंधन के खिलाफ मैदान में थे जिसकी केंद्र में भी सरकार है. राज्य में भी सरकार है, चुनाव आयोग जिसका प्रचारक है, लठैत है. हम इतने बड़े गठबंधन के खिलाफ अकेले लड़े, परिणाम हमारे पक्ष में नहीं है लेकिन हमारी लड़ाई जारी रहेगी.
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