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नियर डेथ एक्सपीरियंस के बाद बदली डॉ. राजीव पार्टी की जिंदगी, डॉक्टर ने साझा किया अपना व्यक्तिगत अनुभव | Dr rajiv parti Near Death Experience Anesthesiologist change life after hell and Heaven story



मृत्यु के बिल्कुल करीब जाकर वापस लौटने (Near Death Experience – NDE) का एक चौंकाने वाला दावा कैलिफोर्निया के एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव पारती ने किया है. साल 2010 में प्रोस्टेट कैंसर की आपातकालीन सर्जरी के दौरान, जब डॉ. पारती को बेहोश किया गया, तब उन्होंने खुद को ऑपरेशन टेबल से ऊपर हवा में तैरते हुए पाया. इस दौरान उन्होंने न केवल ऑपरेशन कक्ष की गतिविधियों को देखा, बल्कि भारत में मौजूद अपनी मां और बहन को भी महसूस किया. डॉ. पारती का दावा है कि उनकी चेतना ने नरक जैसी डरावनी जगह से लेकर देवदूतों और असीम शांति वाले दिव्य लोक तक का सफर तय किया. इस अलौकिक अनुभव के बाद उन्होंने अपनी विलासितापूर्ण जिंदगी और आलीशान बंगला छोड़ दिया तथा अब वे लोगों को मानसिक तनाव से उबारने के लिए एक आध्यात्मिक हीलर के रूप में काम कर रहे हैं.

जब शरीर से अलग हो गई रूह

बात साल 2010 की है. डॉ. पारती प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी के बाद हुए गंभीर इन्फेक्शन (सेप्टीसीमिया) से जूझ रहे थे. क्रिसमस की एक शाम उन्हें इमरजेंसी सर्जरी के लिए ले जाया गया. जैसे ही उन्हें जनरल एनेस्थीसिया दिया गया, उनका उनका शरीर मृत हो गया.   

डॉ. पारती बताते हैं, “मैंने खुद को ऑपरेशन टेबल से करीब 10-12 फीट ऊपर हवा में तैरते हुए देखा. एक एनेस्थीसियोलॉजिस्ट होने के नाते मेरा पहला वैज्ञानिक दिमाग यही सोच रहा था कि क्या मेरी दवा में कुछ गड़बड़ है? लेकिन यह कोई भ्रम नहीं था. मैं न सिर्फ उस कमरे में हो रही सर्जरी को देख पा रहा था, बल्कि उसी वक्त भारत में बैठी अपनी मां और बहन को भी महसूस कर पा रहा था. उनके कपड़ों का रंग तक मुझे साफ दिख रहा था, जिसे बाद में मैंने फोन करके कन्फर्म भी किया.”  

अजीब शक्लों वाले साये चीख रहे थे

डॉ. पारती ने दावा किया कि हवा में तैरने के बाद उनकी चेतना एक बेहद डरावने और अंधकारमयी लोक में पहुंची, जहां बिजली कड़क रही थी और अजीब शक्लों वाले साये चीख रहे थे. पारती को महसूस हुआ कि यह उनके इस जीवन के अहंकार, स्वार्थ और दूसरों के प्रति उनके रूखे व्यवहार का नतीजा था. तभी उनके स्वर्गीय पिता वहां प्रकट हुए और उन्होंने बेटे पारती का हाथ पकड़कर एक चमकदार टनल की तरफ बढ़ाया.

टनल पार करते ही पारती को दो देवदूत (राफेल और माइकल) मिले. एक हिंदू परिवार में जन्मे डॉक्टर के लिए इन ईसाई देवदूतों का मिलना हैरान करने वाला था, लेकिन वे उन्हें एक बेहद खूबसूरत और शांत वादियों वाले लोक में ले गए, जहां हवा में ‘ॐ’ की गूंज सुनाई दे रही थी. वहां वे एक ऐसी रोशनी के सामने थे, जो हजार सूर्यों जितनी चमकदार थी, लेकिन उसमें आंखों को चौंधियाने वाली चुभन नहीं बल्कि असीम प्रेम और शांति का अहसास था. 

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लगभग संन्यासी जैसा जीने लगे जीवन

उस दिव्य रोशनी से डॉ. पारती को संदेश मिला कि उन्हें एक नया जीवन दिया जा रहा है, लेकिन अब उन्हें भौतिकवाद छोड़कर एक ‘हीलर’ (आत्मा का इलाज करने वाला) बनना होगा. वे जागते ही पूरी तरह बदल चुके थे. उन्होंने अपना 11 हजार वर्ग फुट का आलीशान बंगला और महंगी स्पोर्ट्स गाड़ियां (हमर और मर्सिडीज) बेच दीं और अब वे एक साधारण टोयोटा कैमरी हाइब्रिड चलाते हैं.  पहले अपराध और थ्रिलर शो देखने वाले डॉ. पारती अब टीवी पर सिर्फ फूड या ट्रैवल चैनल देखते हैं. 

उन्होंने डिप्रेशन, नशा और क्रॉनिक पेन (दवाओं की लत) को ‘आत्मा की बीमारी’ माना और अब वे लोगों को इससे उबरने में मदद कर रहे हैं.  डॉ. पारती के अनुसार, इस पूरे अनुभव ने उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा मंत्र दिया- ‘माफ करो, प्यार करो और खुद को ठीक करो’. मौत सिर्फ शरीर की होती है, आत्मा का सफर कभी खत्म नहीं होता. 

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(नोट: यह आर्टिकल डॉ. राजीव पारती के दावों और अनुभवों के आधार पर लिखा गया है. एनडीटीवी इंडिया इन दावों की पुष्टि नहीं करता.)




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