

बिहार के कटिहार जिले के बरारी प्रखंड की मोहनाचांदपुर पंचायत से कुछ दिन पहले ऐसी तस्वीरें सामने आई थीं, जिन्होंने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया था. बाढ़ से घिरे इलाके में 12 से 14 साल के बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर नाव चला रहे थे. ये बच्चे बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा रहे थे और इसके बदले उनसे 5 से 10 रुपये तक ले रहे थे.
इस पूरे मामले को एनडीटीवी ने प्रमुखता से उठाया. खबर प्रसारित होने के बाद जिला प्रशासन ने इसका संज्ञान लिया और मामले की जांच कराई. प्रशासन ने पाया कि जिन नावों को बच्चे चला रहे थे, वे निजी नावें थीं और बच्चों के परिजन ही उन्हें नाव लेकर जाने की अनुमति दे रहे थे.
परिजनों को दी गई सख्त हिदायत
कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन को मीडिया रिपोर्ट के जरिए इस मामले की जानकारी मिली थी. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए. जांच में तथ्य सामने आने के बाद बच्चों के परिजनों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे नाबालिग बच्चों को नाव चलाने की अनुमति न दें.
जरूरत वाले इलाकों में भेजी गईं पांच नावें
जिलाधिकारी के अनुसार संबंधित अंचलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर जरूरत वाले स्थानों को चिन्हित किया गया है. लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए पांच नावें उपलब्ध करा दी गई हैं. प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है.
जलस्तर घटा, लेकिन प्रशासन सतर्क
प्रशासन के मुताबिक जिले की प्रमुख नदियों का जलस्तर अब खतरे के निशान से नीचे है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. इसके बावजूद संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह तैयार है. पर्याप्त नावों की व्यवस्था की गई है. निजी नावों का पंजीकरण कराया गया है. साथ ही खाद्यान्न, दवाइयों और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है. इस कार्रवाई को NDTV की खबर का बड़ा असर माना जा रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए बच्चों को जोखिम से दूर रखने और लोगों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की है.





