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सैयद सोहेल का शो: यूपी में काशी से कानपुर तक बाढ़ का संकट, प्रधानमंत्री ने लिया राहत कार्यों का अपडेट | Syed Sohail Show Flood crisis in UP from Kashi to Kanpur Prime Minister takes stock relief operations 



त्तर प्रदेश में गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में संकट खड़ा कर दिया है. सबसे ज्यादा चिंता वाराणसी की स्थिति को लेकर है. काशी में बाढ़ जैसे हालात बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद जिला प्रशासन से संपर्क किया. उन्होंने वाराणसी के डीएम और मेयर से फोन पर बात कर गंगा के जलस्तर, राहत शिविरों और प्रभावित लोगों की स्थिति की जानकारी ली. प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों को कम से कम परेशानी हो और राहत कार्य युद्धस्तर पर चलाए जाएं.

काशी में गंगा का रौद्र रूप

वाराणसी में गंगा का जलस्तर 70 मीटर के ऊपर पहुंच चुका है और इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. बाढ़ के कारण गंगा में नाव संचालन रोक दिया गया है. गंगा का पानी तेजी से शहर की सड़कों और रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहा है.

वरुणा नदी का पानी भी कई बस्तियों में घुस गया है. हालात ऐसे हैं कि कई गलियों में नावें चल रही हैं. मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की गलियों तक पानी पहुंच चुका है. जल पुलिस थाना भी बाढ़ की चपेट में आ गया है. नमो घाट समेत गंगा के सभी 84 घाट जलमग्न बताए जा रहे हैं. मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार छतों पर किए जा रहे हैं और शवों को नाव के जरिए वहां तक पहुंचाया जा रहा है.

प्रयागराज, कानपुर और बलिया भी प्रभावित

प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है. गंगा किनारे के कई रिवर फ्रंट पानी में डूब चुके हैं. NDRF, SDRF और जल पुलिस लगातार गश्त कर रही हैं.

कानपुर में पांडु नदी का उफान लोगों के लिए परेशानी बन गया है. एक हजार से अधिक परिवार बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे हुए हैं. कई घरों में कमरे तक पानी भर गया है और लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं. बलिया में गंगा और सरयू दोनों नदियां उफान पर हैं. कई इलाकों में कमर तक पानी भर गया है और सड़कों पर नावें चल रही हैं.

चित्रकूट और सोनभद्र में भी संकट

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी सड़कों तक पहुंच गया है. 500 से ज्यादा दुकानें और 20 से 25 होटल प्रभावित हुए हैं. वहीं मकान गिरने से एक पिता और उसके दो बच्चों की मौत हो गई. सोनभद्र में रिहंद बांध ओवरफ्लो हो गया है. जलस्तर नियंत्रित करने के लिए बांध के छह गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है.

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