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नेपाल बाढ़ से बाल-बाल बचे आंध्र प्रदेश के 10 श्रद्धालु, ड्राइवर की सूझबूझ और वीजा में देरी बनी वरदान | Andhra Pradesh 10 pilgrims Narrowly Escape Nepal floods; Driver presence of mind and visa delay prove Blessing



अमरावती/काठमांडू:

नेपाल में आई भीषण बाढ़ में अभी तक 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. 1500 से अधिक लोग लापता है. नेपाल की इस विशानकारी त्रासदी ने भारत को भी गहरा जख्म दिया है. नेपाल में रह रहे भारत के सैकड़ों लोग इस हादसे के बाद से ट्रेसलेस हैं. इसमें कई लोग कैलास मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर गए थे. लेकिन इस बीच आंध्र प्रदेश के एक ऐसे श्रद्धालुओं की कहानी भी सामने आई, जिसने ‘जाको राखे साईया, मार सके न कोए’ वाली कहावत को फिर से चरितार्थ कर दिया है. आंध्र प्रदेश के ये 10 श्रद्धालु नेपाल बाढ़ की त्रासदी में फंस सकते थे. लेकिन ड्राइवर की सूझबूझ और वीजा में देरी उनके लिए वरदान बन गई. 

दरअसल आंध्र प्रदेश के भीमिली और विशाखापट्टनम के 10 तेलुगु श्रद्धालुओं का एक समूह नेपाल की यात्रा पर था. ये लोग शाइन ट्रैवल्स के जरिए तीर्थयात्रा पर निकले थे और उनके साथ भीमिली के ZPTC सदस्य गाडू वेंकटप्पाडु भी मौजूद थे. समूह का कहना है कि चीन का वीजा मिलने में हुई तीन दिन की देरी ने उनकी जान बचा दी.

वीजा में देरी बनी जीवनदान

श्रद्धालुओं के मुताबिक, चीनी वीजा समय पर नहीं मिलने की वजह से उन्हें काठमांडू में रुकना पड़ा. उनका मानना है कि अगर वीजा एक दिन पहले मिल गया होता तो वे उसी समय उस इलाके में मौजूद होते जहां बाद में भीषण फ्लैश फ्लड आई. यात्रियों ने इसे भगवान की कृपा बताया.

आंखों के सामने दिखी तबाही

समूह ने बताया कि काठमांडू से रवाना होने के बाद वे करीब 80 किलोमीटर का सफर तय कर चुके थे और मंजिल तक पहुंचने के लिए लगभग 80 किलोमीटर की दूरी बाकी थी. इसी दौरान उन्होंने अचानक भारी मात्रा में पानी का तेज बहाव और बांध जैसी संरचना के टूटने का दृश्य अपने सामने देखा, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई.

ड्राइवर की सूझबूझ से बची जान

श्रद्धालुओं ने अपने ड्राइवर की सतर्कता की जमकर तारीफ की. उनका कहना है कि खतरे को भांपते ही ड्राइवर ने तुरंत वाहन को सुरक्षित दिशा में मोड़ दिया और सभी यात्रियों को खतरे से दूर पहुंचा दिया. इसी त्वरित फैसले की वजह से पूरा समूह सुरक्षित बच निकला.

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