
ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक प्रदेश की मोहन यादव सरकार विजय शाह के खिलाफ केस चलाने की अनुमति नहीं देगी. इसको लेकर कैबिनेट में फैसला लिया गया है.
हालांकि अभी इसको लेकर सरकार का आधिकारिक बयान नहीं आया है. इसको लेकर सरकार ने तर्क दिया है कि मंत्री विजय शाह अपने बयान के लिए कई बार सार्वजनिक माफी मांग चुके हैं. वहीं इस मामले को लेकर बनी SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है.
मंत्री के खिलाफ केस चलाने को लेकर सरकार की मंजूरी लंबित है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार से जल्दी फैसला लेने को कहा था. वहीं अब इस मामले पर 31 अगस्त को सुनवाई होनी है. इससे पहले सरकार कोर्ट के सामने एफिडेविट के जरिए अपना रुख स्पष्ट करेगी.
इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी जांच पूरी कर चुका है और उसने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196(1)(ए) के तहत विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी है. किसी लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है, इसलिए एसआईटी की रिपोर्ट आने के बावजूद मामला लंबित है.
मई 2025 में इंदौर के पास महू में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. कर्नल कुरैशी ने भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मीडिया को जानकारी दी थी.
विजय शाह की टिप्पणी को व्यापक रूप से कर्नल कुरैशी को पहलगाम आतंकी हमले में शामिल आतंकवादियों के “समुदाय” से जोड़कर देखने के रूप में लिया गया. इस बयान के बाद देशभर में विरोध हुआ और उनके इस्तीफे की मांग उठी.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए टिप्पणी को “नाली की भाषा” बताया था और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की और अभियोजन मंजूरी में देरी को लेकर राज्य सरकार को कई बार फटकार लगाई.
