
रीवा जिले के सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ के कारण इंसान की अंतिम यात्रा भी मुश्किल हो गई. जवा जनपद की ग्राम पंचायत रौली में एक मृतक के शव को घर तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को ड्रमों का सहारा लेना पड़ा.
घटना ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक और पंचायत स्तर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रौली निवासी मोतीलाल तिवारी का संजय गांधी अस्पताल, रीवा में निधन हो गया था. परिजन जब उनका शव लेकर गांव पहुंचे, तो बाढ़ के पानी के कारण घर तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह बाधित था.
जापान में धीरेंद्र शास्त्री बोले- ‘हिंदू राष्ट्र कागजों पर नहीं…’
ग्रामीणों को ड्रम का लेना पड़ा सहारा
ग्रामीणों ने कई ड्रमों को आपस में बांधकर एक अस्थायी तैरता प्लेटफॉर्म तैयार किया और उसी पर शव रखकर पानी पार कराया. शव को घर पहुंचाने के बाद अंतिम संस्कार किया गया. घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है.
परिजनों ने लगाए ये आरोप
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने शव को घर तक पहुंचाने के लिए महिला सरपंच से मदद मांगी, लेकिन कथित तौर पर सरपंच और उनके देवर व जीआरएस विवेक तिवारी ने सहायता करने से इनकार कर दिया.
ग्रामीणों ने किया ये दावा
ग्रामीणों का दावा है कि उनसे कथित तौर पर कहा गया कि “यह हमारा काम नहीं है.” हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच और बाढ़ प्रभावित इलाकों में बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है.
बता दें कि मध्य प्रदेश के रीवा में भारी बारिश के बाद नदियां उफान पर आ गई हैं और बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है. इस बीच रीवा के गावों में भी बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. ऐसे में किसी कि मौत के बाद रास्तों पर जलभराव की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है.
छतरपुर: महिला ने किया इनकार तो सनकी आशिक ने बच्चों को किया किडनैप, कुएं में मिले शव
